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    सीटें कम हुई तो कॉलेजों ने बढ़ाई मनमानी फीस, पीजी कालेज में प्रवेश के लिए मारामारी

    Published: Tue, 18 Jul 2017 08:26 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 08:26 AM (IST)
    By: Editorial Team

    ुरैना। जीवाजी विश्वविद्यालय ने पिछले महीने जिले के तकरीबन सभी निजी कॉलेजों की सीटों में भारी संख्या में कटौती कर दी थी। सीटों की कटौती भी करीब 85 फीसदी तक की है, जिससे कॉलेज संचालकों को खासा नुकसान हुआ। अब निजी कॉलेजों ने जेयू द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई के लिए रास्ते निकाल लिए हैं। एक तो कॉलेज संचालकों ने मनमाने तरीके से फीस बढ़ा दी है और दूसरे वे अभी भी छात्रों को गुमराह करके उनके दस्तावेज व फार्म प्रवेश के नाम से रख रहे हैं। बाद में इन छात्रों के फार्म प्राइवेट या दूरस्थ शिक्षा से भरवा देंगे। इधर फीस बढ़ने व सीट कम होने का असर यह हुआ है कि जिले के सरकारी कॉलेजों में प्रवेश के लिए मारामारी मची है। छात्रों को सरकारी कॉलेजों में सीट फुल होने से प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि जेयू ने जून महीने में जिले के सभी निजी कॉलेजों की सीटों में इसलिए कटौती कर दी क्योंकि छात्रों की संख्या के मुकाबले उनके यहां संसाधन व शैक्षणिक व्यवस्था नहीं थी। चूंकि जिन कारणों को लेकर सीटें जेयू ने कम की थी, वे इतनी स्ट्रांग थीं कि कॉलेज संचालक जेयू के खिलाफ न्यायालय में भी नहीं जा सके। ऐसे में सीटें कम होने से कॉलेज संचालकों को नुकसान हुआ। इसके लिए कॉलेज संचालकों ने तोड़ निकाल लिया है।

    इस तरह सीटें कम की गई थीं कॉलेजों की

    जेयू ने निजी कॉलेजों की सीटें 85 फीसदी तक कम कर दी है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीएसयू कॉलेज में बीएससी की सीटें पहले 9 सौ के करीब थीं। अब केवल 120 सीट ही रह गई हैं।

    यह तोड़ निकाला है निजी कॉलेजों ने

    - दो से तीन गुना बढ़ाई फीसः निजी कॉलेज संचालकों ने सीट कम होने के बाद अपने यहां की फीस में तीन से चार गुना की बढ़ोतरी कर दी। इसी बात से समझें कि पहले इन कॉलेजों की फीस 5 हजार तक ही थी, लेकिन अब कालेज संचालक 15 से 20 हजार रुपए वसूल रहे हैं। खासबात यह है कि वे फीस में किसी भी तरह के सोर्स के लगाने के बाद भी फीस कम नहीं कर रहे हैं।

    - प्रैक्टिकल व परीक्षा फीस ले रहे अलग सेः पहले एक ही फीस में कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल व परीक्षा शुल्क शामिल रखते थे, लेकिन अब कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल व परीक्षा शुल्क भी अलग से ले रहे हैं।

    छात्रों को कर रहे गुमराह

    बेशक कॉलेज संचालकों की सीट कम हो गई हों, लेकिन कॉलेज संचालक छात्रों को गुमराह करके प्रवेश देने की बात कर रहे हैं और उनके दस्तावेज व फार्म जमा कर रहे हैं। बताया जाता है कि कॉलेज संचालक उन्हें प्रवेश की गारंटी दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कॉलेज संचालक इन छात्रों को बाद में प्राइवेट व दूरस्थ शिक्षा केन्द्र से फार्म भरवाएंगे। चूंकि प्रवेश का समय निकल जाएगा, इसके बाद छात्रों के लिए प्राइवेट या दूरस्थ से ग्रेजुएशन करना मजबूरी हो जाएगा।

    कॉलेजों में सीट कम होने का यह हुआ है असर

    - शहर के पीजी कॉलेज सहित जिले के तकरीबन सभी सरकारी कॉलेजों में सभी विषयों की सीटें भर चुकी हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के पीजी कॉलेज में बीएससी की कक्षाओं के लिए प्रवेश में मेरिट का कटआफ 90 फीसदी पर गया है। साथ ही अन्य विषयों की सीटें भी फुल हो गई हैं।

    - सरकारी कॉलेजों में 75 प्रतिशत से अधिक अंक वालों की फीस भी नहीं लग रही है। साथ ही यदि 75 प्रतिशत से कम अंक वालों से महज 2200 रुपए फीस ही लग रही है। इसलिए भी अब सरकारी कॉलेजों की सीटें भर गई हैं।

    कथन

    - निजी कॉलेजों की सीटें कम होने व फीस बढ़ाने की वजह से कॉलेज की सभी सीटें भर गई हैं। हालांकि पिछले सालों में ऐसा नहीं था। कॉलेज की सीटें खाली रह जाती थीं। बीएससी की सीटें तो फुल हो ही गई हैं। आर्ट व कॉमर्स की भी कक्षाओं की सीटें भर गई हैं।

    डॉ. सीएल गुप्ता, प्रभारी प्राचार्य, उत्कृष्ट महाविद्यालय मुरैना

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