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    हाईकोर्ट के आदेशों को ठेंगा, ओपीडी में बैठकर मरीजों को नहीं देख रहे डॉक्टर

    Published: Sat, 14 Jan 2017 05:39 PM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 05:39 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    ुरैना। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों को मरीज देखने का टारगेट पूरा करना था। मरीज देखने के लिए टारगेट न्यायालय के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने फिक्स किए थे। शुरुआत में डॉक्टरों ने टारगेट के मुताबिक काम भी किया, लेकिन बाद में डॉक्टर पुराने ढर्रे पर आ गए और ओपीडी में बैठना भी बंद कर दिया। हालांकि विभाग ने टारगेट 1 मार्च 2013 में फिक्स किए थे। इसके खिलाफ डॉक्टर न्यायालय में चले गए थे, लेकिन दिसंबर 2014 में न्यायालय ने विभाग के आदेश को सही भी ठहराया था। विभाग व न्यायालय के आदेश के बाद भी डॉक्टर न तो ओपीडी में बैठते हैं और न ही टारगेट के मुताबिक मरीजों को देखते हैं।

    हर पद के लिए ये बनाए गए थे ये लक्ष्य

    - आरएमओः आरएमओ को अस्पताल खुलने से आधा घंटे पहुंचना होगा। साथ ही सेवाओं को क्रियाशील बनाना व डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा।

    - अस्पताल अधीक्षकः अस्पताल अधीक्षक को अस्पताल में सुबह 9 से 4 बजे तक रहना होगा। साथ ही अस्पताल के दो राउंड लेने होंगे। डॉक्टरों द्वारा देखे गए मरीजों व ऑपरेशन की सप्ताह में एक बार समीक्षा करनी होगी।

    - सर्जनः अस्पतालों में सर्जरी विशेषज्ञों को महीने में मिले लक्ष्य के मुताबिक ऑपरेशन करने होंगे।

    यह हो रहा है

    आरएमओ तो अस्पताल में आते हैं, लेकिन अस्पताल के खुलने के बाद। चूंकि वर्तमान में सीएमएचओ के पास ही सिविल सर्जन की जिम्मेदारी है। इसलिए दोनों जगहों के चक्कर में सीएस भी अस्पताल को उतना समय नहीं दे पाते। ऐसे में ओपीडी में डॉक्टरों के बैठने पर निगरानी नहीं हो पा रही है। इससे डॉक्टर मनमर्जी से ही ओपीडी में मरीजों को देखते हैं।

    यह होना था फायदा

    - लक्ष्य को पूरा करने के लिए डॉक्टर ओपीडी में बैठेंगे। ओपीडी में बैठेंगे तो मरीजों को देखेंगे। ऐसे में मरीजों को डॉक्टरों को तलाशना नहीं पड़ेगा, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है ओपीडी में मरीजों को परेशानी हो रही है।

    - अभी डॉक्टर अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन करने की जगह अपने निजी अस्पतालों को तरजीह देते हैं, लेकिन अब उन्हें अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अस्पताल में ही ऑपरेशन करने होंगे। शुरुआत में तो ऑपरेशन हुए, लेकिन अब ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन कम हो रहे हैं।

    - सिविल सर्जन व आरएमओ के समय पर अस्पताल में समय से पहुंचने से डॉक्टरों पर भी समय पर अस्पताल में आने का दबाव बढ़ेगा। इससे मरीजों को डॉक्टरों का अनावश्यक रूप से इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

    - नियमों के मुताबिक अस्पताल की पैथोलॉजी लैब को भी जांचों का टारगेट दिया गया है। इसलिए लैब के कर्मचारी भी मरीजों की जांच अधिक से अधिक करेंगे। जिससे मरीजों को भी जांच कराने में दिक्कत नहीं आएगी, लेकिन सीएस के समय पर न आने से डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठ रहे हैं।

    कथन

    - स्वास्थ्य विभाग के आदेश के मुताबिक पहले से ही लक्ष्य के मुताबिक काम कर रहे थे। अब इन नियमों को सख्ती से लागू करेंगे, जिससे मरीजों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

    डॉ.पदमेश, आरएमओ, जिला अस्पताल मुरैना

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