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    सूख गया तालाब, बजबजा रही गंदगी

    Published: Fri, 19 May 2017 11:19 PM (IST) | Updated: Fri, 19 May 2017 11:19 PM (IST)
    By: Editorial Team

    करेली। नईदुनिया न्यूज

    वर्तमान दौर में जहां समूचे जिले में नदी और तालाबों को संरक्षित व जीर्णोद्धार की बात जोरों-शोरों से उठाई जा रही है। इनमें कुछ जगह तालाब व नदी पर जीर्णोद्धार का कार्य शुरू भी हो चुका है। पर नगर का एकमात्र तालाब की ओर प्रशासन देखना भी पंसद नहीं कर रहा है। जबकि यह तालाब नगर के ही एक व्यक्ति द्वारा खुद की निजी जमीन पर बनवाकर आम जनता के लिए छोड़ा गया है। पर अतिक्रमण की चपेट में आने के बाद इसकी हालत बद से बदतर हो गई है और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ इसे देख रहा है।

    अतिक्रमण की चपेट में तालाब

    नगर का एकमात्र तालाब जो नगर के मनमोहनदास काबरा द्वारा 80 वर्ष पूर्व करीब 12 एकड़ जमीन पर बनवाया। जिसका उपयोग समस्त क्षेत्रवासी हर कार्य के लिए करते थे, पर इस तालाब के आसपास कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे यह तालाब अपना स्वरूप खो चुका है। अतिक्रमण को हटावाने के लिए कई बार तालाब के मालिक द्वारा प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, पर इस पर अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई प्रशासन द्वारा नहीं की गई है।

    कैसे हो जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण का कार्य

    जब तक इस तालाब के आसपास से पूर्णतः अतिक्रमण को नहीं हटाया जाएगा। तब तक इसका जीर्णोद्धार होना संभव नहीं है, न ही ऐसी स्थिति में इसका सौंदर्यीकरण भी किया जा सकता है। जब इस संबंध में प्रशासन से जानकारी दी गई तो प्रशासन का कहना है कि तालाब मालिक द्वारा अनापत्ति दी जाती है, तब जाकर इसमें कोई कार्य किया जा सकता है। इस पर तालाब मालिक का कहना है कि प्रशासन पहले तालाब के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करता है, तो मैं तत्काल ही तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए अनापत्ति दे दूंगा।

    अतिक्रमण हटाने संबंधी बात पर बगले झांकता है, प्रशासन

    जब भी नगर के किसी भी अतिक्रमण को हटाए जाने के बात सामने आती है, तो नगर प्रशासन हो, चाहे तहसील का राजस्व विभाग। ए दोनों विभाग गोलमोल जवाब देकर इस विषय से इतिश्री करने की हमेशा ही कोशिश में लगे रहते हैं। यहीं वजह है, कि नगर के पसरे अतिक्रमण पर अभी तक ठोस कार्रवाई संभव नहीं हो सकी है। जबकि जल स्रोत को बचने व इसके सद्उपयोग के लिए प्रशासन को गंभीरता से विचार कर तालाब के हर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना चाहिए, इसके लिए तालाब मालिक द्वारा प्रशासन को कई बार अवगत करा चुके हैं। आखिर प्रशासन अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा, यह एक बड़ा सवाल है।

    गदंगी के कारण तालाब अनुपयोगी

    तालाब के आसपास जितने भी घर बने हुए हैं, उनका निस्तारी पानी के साथ नगर पालिका द्वारा बनवाए गए सार्वजनिक शौचालयों का भी गंदा पानी इसी तालाब में लगातार जा रहा है। जिस वजह से तालाब का हर एक किनारा गदंगी से अटा पड़ा हुआ है। जिसके कारण बारिश में मौसम में भी इस तालाब का कोई उपयोग नहीं होता है, न तो आम जनता इसका उपयोग करती है, और न ही मवेशी इस तालाब का पानी पीते है। ऐसी स्थिति में तालाब का किसी भी प्रकार से उपयोग नहीं किया जा रहा है।

    इसी तालाब में होता है मूर्ति विर्सजन

    गणेशोत्सव व दुर्गोत्सव समितियों के बताए अनुसार बड़ी आस्था के साथ गणेशोत्सव व दुर्गोत्सव पर प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है और लोगों को प्रशासन के आगे मजबूर होकर इस गदंगी से भरे तालाब में ही मूर्ति विर्सजन करना पड़ता है। जबकि इस तालाब में विर्सजन को लेकर हर वर्ष लोगों द्वारा विरोध भी किया जाता है, पर इसका असर प्रशासन पर नहीं होता है।

    तालाब में उगी कंटीली झाड़ियां

    तालाब के देखरेख के आभाव में यह तालाब पूर्णतः सूख गया है और उसमें कंटीली झाड़ियां उग आई है। यदि इस तालाब का गहरीकरण, और सौन्दर्यीकरण कर दिया जाए, तो पूरे वर्षभर इसमें पानी रहेगा और लोग इसका उपयोग कर सकेंगे। साथ ही इससे जलस्तर भी बढ़ेगा और लोगों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। इस कार्य को कराने के लिए शासन प्रशासन के साथ नगर के लोगों को आगे आकर इस कार्य में अपनी सहभागिता करनी चाहिए।

    इनका कहना है...

    यह निजी तालाब है, अगर इसकी अनापत्ति दी जाती है, तो तालाब के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा सकता है। इसके आसपास के अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही भी जीर्णोद्धार के समय ही की जा सकती है।

    प्रमोद चतुर्वेदी, तहसीलदार करेली

    तालाब प्राइवेट है, जिसकी अभी तक सहमति नहीं मिली पाई है, इसके लिए तहसीलदार साहब ने भी बहुत प्रयास किए है। अभी भी प्रयास जारी है, जैसे ही सहमति मिल जाएगी, तो तालाब के जीर्णोद्धार कराया जाएगा।

    - मनोज श्रीवास्वत सीएओ करेली

    तालाब के आसपास हुए अतिक्रमण के लिए प्रशासन को कई बार अवगत करा चुका हूं, वह अतिक्रमण का कार्रवाई करे, तो सौंदर्यीकरण के लिए अनापत्ति दे सकता हूं।

    मनमोहनदास काबरा तालाब मालिक

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