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    थाईलैंड में लिंग परिवर्तन तो करा लिया, लेकिन इंडिया पहुंचते ही हो गई मुसीबत

    Published: Wed, 13 Sep 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 09:13 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नीमच। एक युवक ने 2013 में थाईलैंड में लिंग परिवर्तन कराया। 2017 में दस्तावेज में लिंग और नाम परिवर्तन के लिए आवेदन दिया। विज्ञप्ति प्रकाशित कर आपत्ति बुलाई तो एक अभिभाषक की आपत्ति से मामला न्यायालय में पहुंच गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने दावे को खारिज कर दिया।

    इस समूचे मामले का खुलासा 12 सितंबर 2017 को द्वितीय व्यवहार न्यायालय वर्ग 1 में एक वाद के खारिज होने से हुआ। मामला शहर के एक सघन व्यापारिक क्षेत्र के करीब 27 वर्षीय युवक से जुड़ा है। युवक ने करीब 2013 में थाईलैंड में लिंग परिवर्तन कराया था। इसके बाद आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन के लिए उसने प्रक्रिया शुरू की।

    करीब तीन माह पूर्व समाचार पत्रों में विज्ञप्ति का प्रकाशन कर दावे-आपत्ति बुलाए गए। इस पर अभिभाषक संदीप लोढ़ा ने आपत्ति ली। उन्होंने न्यायालय की अनुमति के बिना लिंग परिवर्तन कराए जाने को आधार बनाते हुए दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन को गलत बताया। इस पर समूचा प्रकरण संबंधित के माध्यम से न्यायालय में रखा गया। पूर्व के प्रमाण पत्र और दस्तावेज प्रस्तुत कर नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति चाही गई, जिसे दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया गया।

    क्या है मामला

    लिंग परिवर्तन कराने वाले युवक का जन्म 21 अक्टूबर 1990 को राजस्थान के उदयपुर में हुआ। पिता की निजी क्षेत्र में नौकरी के कारण वह परिवार के साथ नीमच आ गया तभी से वह यहीं रह रहा था। पिता भी नीमच में ही सेवानिवृत्त होकर बस गए। 24 अप्रैल 2013 को युवक ने थाईलैंड में लिंग परिवर्तन करा लिया। नाम भी रख लिया, लेकिन दस्तावेजों में अब भी पूर्व की तरह नाम और लिंग दर्ज है। इसमें परिवर्तन के लिए युवक ने आवेदन किया था।

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