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    इस सूनसान बीहड़ में भगाए जाते हैं भूत, पाकिस्तान से भी पहुंचते हैं लोग

    Published: Tue, 16 May 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Wed, 17 May 2017 08:25 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नीमच। अरावली पर्वत श्रृंखला के बीहड़ और सूनसान क्षेत्र में भूत बाबजी का स्थान है। यहां की शोहरत मप्र-राजस्थान के साथ पाकिस्तान तक है। कई लोग प्रेत बाधा और अन्य परेशानियों से मुक्ति के लिए बाबजी के दरबार में गुहार लगाते हैं।

    जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर अठाना और सुखानंद के बीच अरावली पर्वत श्रृंखला में भूत बाबजी का स्थान है। यहां ठाकुर अमरसिंह के साथ मां कालिका और पीर बाबा का स्थान भी है।

    भोपा शंकरलाल, सेवादार बाबूलाल गुंदावत और मुकेश धाकड़ भूत बाबजी के स्थान पर सेवा देते हैं। प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक चौकी लगती है। नियत स्थान पर बैठकर भोपा शंकरलाल भूत बाबजी के बताए अनुसार पीड़ितों की फरियाद सुनते हैं। उनकी मन्नात पूरी होने का आशीष देते हैं।

    करीब 10 साल पूर्व पाकिस्तान के एक फौजी ने संतान नहीं होने पर गुहार लगाई थी। मन्नात पूरी होने पर 500 से ज्यादा रिश्तेदारों के साथ यहां दस्तक दी थी। झूला अर्पित कर भोज भी रखा था। पाकिस्तानी फौजी के अलावा इस्लामाबाद, सिंध सहित अन्य क्षेत्रों से भी पाकिस्तानी नागरिक यहां पहुंचते हैं।

    यह आते हैं शरण में

    प्रेत बाधा, देव पीड़ा, निःसंतान दंपती, जिन्ना और पिसाच से प्रताड़ित, जादू-टोने और गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग राहत की आस में यहां आते हैं।

    मन्नात पूरी होने पर चढ़ावा

    भूत बाबजी के दरबार में आने से मन्नात पूरी होने पर संबंधित व्यक्ति चढ़ावा अर्पित करता है। दाल-बाटी, दाल-चूरमा और अन्य व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। बलि और मदिरा भी अर्पित की जाती है। निःसंतान दंपती संतान होने पर बांस की छबड़ी के रूप में झूले अर्पित करते हैं।

    कौन है भूत बाबजी

    भूत बाबजी का ताल्लुक राजस्थान के भैंसरोड़गढ़ ठिकाना से हैं। भूत बाबजी का वास्तविक नाम ठाकुर अमरसिंह था। सालों पूर्व घर में चोरी करते पकड़े जाने पर छोटे भाई ने उन्हें तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया था। उन्हें असमय मृत्यु के मुंह में समाना पड़ा था तभी से वे भूत बाबजी के रूप में विचरण करते हैं।

    भूत बाबजी का सुखानंद से संपर्क

    भूत बाबजी सुखानंद के समीप संजयग्राम के शंकरलाल भोपा (80) के शरीर में प्रकट होते हैं। भूत बाबजी के सेवादार बाबूलाल गुंदावत निवासी केनपुरिया और मुकेश धाकड़ अठाना की मानें तो करीब 35 से 40 साल पूर्व ठाकुर अमरसिंह (भूत बाबजी) भोपा शंकरलाल के स्वप्न में आए। उन्हें सुखानंद और अठाना के बीच नियत स्थान पर विराजित करने की बात कही। इंकार करने पर शुरुआती दौर में शंकरलाल को विक्षिप्त कर दिया। सहमति देने पर उन्होंने ही स्वस्थ किया तभी से अरावली पर्वत श्रृंखला में जंगल क्षेत्र में भूत बाबजी का स्थान विकसित हुआ। यहां ठाकुर अमरसिंह के साथ मां कालिका और पीर बाबा का स्थान है।

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