Naidunia
    Monday, December 11, 2017
    PreviousNext

    15 लाख रुपए हर महीने किराए की पुलिस पर खर्च पर अतिक्रमण हटाने में पुलिस बल न मिलने का बहाना

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि।

    अवैध निर्माण हो या अतिक्रमण। डेढ़ साल पहले पुलिस न होने का बहाना देकर निगम कार्रवाई न होने का बहाना करता था। महापौर आलोक शर्मा ने इससे निपटने के लिए सरकार से सालाना हर महीने 15 लाख रुपए से किराए पर पुलिस बल ले लिया। महिला बाउंसरों की भी तैनाती की पर हालात नहीं बदले। निगम की खुद की पुलिस आराम कर रही होती है और अफसर बल न मिलने का बहाना देकर कार्रवाई टाल देते हैं।

    शहर में भवन अनुज्ञा शाखा ने हाल ही में करीब 100 ऐसी इमारतें चिन्हित की है जो बिना परमिशन के बनी है। एक दिन आधा दर्जन अवैध मकानों को तोड़ने की कार्रवाई भी की गई, लेकिन अब अतिक्रमण की कार्रवाई का मामला पुलिस बल के इंतजार में अटक गया है। निगम के पुलिस सूत्रो के अनुसार अतिक्रमण शाखा बल का प्रयोग अवैध वसूली में करता है। बताया जाता है जब कार्रवाई की बात होती है तो विवाद की आशंका की बात कहकर कार्रवाई रोक दी जाती है। निगम के अफसर भी किसी तरह का विरोध से बचते हुए अपनी नौकरी चलाने में ज्यादा यकीन रखते हैं।

    -----

    महिला बाउंसरों को नहीं दी ट्रेनिंग

    जून में निगम के अतिक्रमण शाखा में प्रायोगित तौर पर करीब 20 महिला बाउंसरों की तैनाती की गई। इनकी संख्या 40 तक किया जाना था। विपरीत परिस्थितियों से निपटने और सेल्फ डिफेंस के लिए ट्रेनिंग भी दी जानी थी। अमले का उपयोग भवन अनुज्ञा शाखा में भी किया जाना था, लेकिन न तो महिला बाउंसरों का संख्या बढ़ाई गई और न ही निगम प्रशासन ट्रेनिंग दे पाया। कार्रवाई के दौरान अधिकतर अतिक्रमणकारी कार्रवाई रोकने के लिए महिलाओं को आगे कर देते हैं।

    ------

    अपर सचिव के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं

    परिषद के नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सगीर ने शहर में लगाए गए अवैध ठेले गुमठियों पर कार्रवाई के लिए वर्ष 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग की मंत्री माया सिंह से लेकर संचालनालय के आयुक्त तक शिकायत की थी। जिसके बाद अपर सचिव ने निगम प्रशासन को अवैध गुमठियां हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निगम ने 6 दिसंबर 2016 को जवाब दिया था कि उन्हें पुलिस बल ही नहीं मिल रहा है।

    -------

    सालाना डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च

    महापौर आलोक शर्मा ने बजट के दौरान निगम की खुद का पुलिस थाना हो इसकी घोषणा की थी। इसके बाद 1 मार्च 2016 को निगम को खुद का पुलिस बल मिला था, जिसमें एक टीआई सहित 22 एसआई व जवान मिले थे। ये पुलिस बल निगम को पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। हर महीने इनके वेतन भत्तों पर करीब 15 लाख रुपए खर्च होते हैं। यह खर्च साल में 1 करोड़ 80 लाख तक पहुंच जाता है।

    -------

    इनका कहना

    अवैध इमारतों की कार्रवाई के दौरान ज्यादा विवाद होने की आशंका होती है। निगम की पुलिस के पास कार्रवाई की शक्तियां नहीं हैं। इसलिए पुलिस बल की मांग की जाती है। पुलिस बल मिलने के बाद अवैध इमारतों पर कार्रवाई की जाएगी।

    मलिका निगम नागर, अपर आयुक्त नगर निगम

    और जानें :  # nigam nigam
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें