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    मृतकों के नाम से तो नहीं चल रही मेडिकल दुकानें, पता कर रही फार्मेसी काउंसिल

    Published: Sat, 20 May 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 10:06 AM (IST)
    By: Editorial Team

    विशाल राठौर, इंदौर। फार्मेसी काउंसिल को शक है कि प्रदेश में कई मेडिकल दुकानें ऐसे फार्मासिस्टों के नाम पर चलाई जा रही हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। अपने इस संदेह को दूर करने के लिए काउंसिल ने 80 साल से ज्यादा उम्र के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर जांच के आदेश दिए हैं।

    मेडिकल दुकान चलाने के लिए रजिस्ट्रर्ड फार्मासिस्ट होना जरूरी है। उसकी मौत हो जाने की स्थिति में मेडिकल दुकान बंद कर दी जाना चाहिए और इसकी जानकारी मप्र राज्य फार्मेसी काउंसिल को दी जानी चाहिए, लेकिन बहुत कम मामलों में काउंसिल को ये जानकारी दी जाती है।

    पांच साल में नवीनीकरण जरूरी

    नियमों के मुताबिक एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की नियुक्ति करने के बाद एक आम आदमी भी मेडिकल लाइसेंस ले सकता है, लेकिन इसका संचालन फार्मासिस्ट द्वारा ही किया जाना चाहिए। इस नियम के तहत कई लोग फार्मासिस्ट रखकर मेडिकल चलाते हैं। हर पांच साल में रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस का नवीनीकरण तो होता है लेकिन इस बीच फार्मासिस्ट की मौत होने की जानकारी कम ही मामलों में मिलती है।

    50 हजार में सैकड़ों उम्रदराज

    फार्मेसी काउंसिल के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 50 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हैं। लगभग 25 हजार मेडिकल स्टोर का संचालन हो रहा है। ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत 1970 से रजिस्ट्रेशन करने और रद्द करने का काम हो रहा है, लेकिन तब से अब तक फार्मासिस्ट की मौत के कारण कितने रजिस्ट्रेशन रद्द हुए इसकी स्पष्ट जानकारी काउंसिल के पास नहीं है।

    अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि सैकड़ों ऐसे फार्मासिस्ट हैं जो काफी उम्रदराज हैं। इसीलिए प्रदेश भर के ड्रग इंस्पेक्टर्स को आदेश जारी कर 80 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर जांच करने के लिए कहा गया है। इस तरह की धांधली को रोकने के लिए अब रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिसमें फार्मासिस्ट के जीवित होने का स्वप्रमाणित दस्तावेज भी मांगा जा रहा है।

    जानकारी स्पष्ट नहीं

    80 वर्ष से अधिक आयु के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर मौका निरीक्षण कर जांच के आदेश दिए हैं। रजिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से भी दस्तावेजों की जांच करवाई जा रही है। कितने फार्मासिस्ट की मौत के बाद जानकारी मिली या स्टोर बंद करवाए गए यह स्पष्ट नहीं है। -प्रमोद शुक्ला, रजिस्ट्रार, फार्मेसी काउंसिल मप्र

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