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    प्लास्टर गिरने पर लगता है छत आ गिरेगी

    Published: Sat, 14 Jan 2017 06:23 PM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 06:23 PM (IST)
    By: Editorial Team

    रीवा। मरम्मत के आभाव में जर्जर हो चुके दशकों पुराने करीब ढाई सौ पुलिस क्वार्टरों में रहने वाले पुलिस कर्मियों के परिजन अपनी जान हथेली पर रखकर रह रहे हैं। हालात यह है कि दीवार और छत का प्लास्टर गिरने पर उन्हें लगता है उन पर छत आ गिरेगी। कमरों के टूटे खिड़की-दरवाजे, उखड़ चुकी बिजली फिटिंग और झूलते नंगे तार, बमुश्किल बंद होने वाले टॉयलेट के दरवाजे, बरसात में टपकती छतें और छप्पर यह तस्वीर है मौजूद पुलिस क्वार्टरों की। पुलिसकर्मियों की मजबूरी यह है कि वे अपनी परेशानी खुलकर बता भी नहीं सकते।

    ड्यूटी पर सताती है चिंता

    भवनों की जर्जर हालत के कारण ड्यूटी के दौरान भी पुलिस कर्मियों को परिवार की चिंता सताती रहती है। उन्हें डर बना रहता है कि कहीं परिवार किसी मुसीबत में न आ जाए। वर्षो से इन भवनों में रह रहे पुलिसकर्मी चिंतित हैं। उनका कहना है कि भवन लगातार जर्जर होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में भवन गिरने का डर बना रहता है। कई बार तो छज्जे आदि टूट भी चुके हैं। हालांकि बाहर का छज्जा होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। पुलिस लाइन सहित जिलेभर के पुलिसक्वार्टरों की यही स्थिति है। आठ सौ क्वार्टरों की जरूरत

    जिला पुलिस बल के पास वर्तमान में 1312 पुलिसकर्मी हैं। जबकि संख्या के हिसाब से विभाग के पास क्वार्टर नहीं हैं। विभाग के पास महज 200 बेहतर कंडीशन वाले क्वार्टर मौजूद हैं। जबकि लगभग 800 क्वार्टरों की और जरूरत है। इनमें से लगभग साढ़े 400 क्वार्टरों की मुख्यालय में जरूरत है। जबकि थाना स्तर पर 100 क्वार्टर की आवश्यकता है। पुलिस लाइन के 262 पुराने और जर्जर क्वार्टर कंडम घोषित करने लायक हैं, लेकिन मजबूरी में पुलिसकर्मी इनमें रह रहे हैं। जो नए क्वार्टर बने भी है वे मुख्यालय में ही बनाए गए हैं। जबकि थाना स्तर पर पुलिस कर्मियों के लिए क्वार्टर को लेकर विभाग की कोई रुचि नहीं दिख रही है। थाना स्तर पर बैरक बनाने की कवायद की जा रही है।

    सफाई और मरम्मत तक नहीं

    सरकारी जर्जर भवनों को लेकर पुलिसकर्मी समय-समय पर विभाग को पत्र लिखकर जानकारी भी देते हैं। इन पत्रों में क्वार्टर के प्लास्टर, फर्श टूटने से लेकर कालोनी में व्याप्त गंदगी एवं सीवरेज पाइप टूटने आदि की जानकारी दी गई है, लेकिन विभाग सफाई और मरम्मत भी नहीं करा पा रहा है।

    साढ़े 400 क्वार्टर का प्रस्ताव

    पुलिस कर्मियों के लिए क्वार्टर की कमी को विभाग के जिम्मेदारों ने न सिर्फ स्वीकार किया बल्कि चिन्हित भी किया है। उस हिसाब से लगभग साढ़े 400 से ज्यादा क्वार्टर की जरूरत है। बताया जा रहा है कि 200 नए क्वार्टर बनाए गए हैं। जबकि 262 पुराने क्वार्टर हैं। इसी तरह जिले के थानों में लगभग 100 पुराने क्वार्टर बने हुए हैं। सोहागी और चोरहटा थाने में नए क्वार्टर बनाए गए हैं। जबकि अन्य थानों में पुराने जर्जर हालत के क्वार्टर हैं। जिसके चलते बैरक बनाने पर विचार विभाग कर रहा है।

    पुराने क्वार्टरों में नहीं है रुचि

    बदलते परिवेश और बेहतर जीवनशैली को लेकर पुलिसकर्मी अब संजीदा हैं। यही वजह है कि पुराने क्वार्टर में पुलिस कर्मियों की रहने की रुचि नहीं है। वे नए क्वार्टर के लिए आवेदन पत्र देते हैं। क्वार्टर न मिलने की स्थिति में किराए पर कमरा लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। हालांकि विभाग ने इस संबंध में विचार मंथन करने के बाद नए क्वार्टर को नए तरीके से बना रहा है और 2 बीएचके क्वार्टर तैयार कराए जा रहे हैं।

    फैक्ट फाइल

    पुलिस कर्मी -1312

    पुराने क्वार्टर-262

    नए क्वार्टर -200

    प्रस्ताव-450

    थानों में क्वार्टर-100

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    क्वार्टर के हालात बहुत खराब हैं। प्लास्टर उखड़ रहा है। पुराना भवन होने के कारण हर समय डर बना रहता है कि कभी भी छज्जा या फिर छत का प्लास्टर टूटकर ऊपर न गिर जाए। सफाई न होने से क्वार्टर के चारों ओर गंदगी है। नारकीय जीवन जी रहे हैं।

    -सूरज पाथेर, पुलिस कर्मी का परिवार।

    पुलिस कर्मियों के लिए 2 बीएचके के नए सर्व सुविधायुक्त क्वार्टर बनाए गए हैं। साढ़े 400 क्वार्टर का प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही ये क्वार्टर बनाए जाएंगे। अभी मुख्यालय पर ही नए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। जबकि थानों में बैरक बनाने पर चर्चा चल रही है। पुराने क्वार्टर में पुलिस कर्मियों की रुचि नहीं है। नए क्वार्टर न मिलने पर वे किराए पर मकान ले लेते हैं।

    -जेपी आर्य, आरआई

    पुलिस लाइन, रीवा।

    फोटो-11, 12 - पुलिस कालोनी में बने पुराने जर्जर क्वार्टर।

    13 - क्वार्टर की स्थिति को बताता पुलिस कर्मी का परिवार।

    14 -सिविल लाइन थाना परिसर में बना पुराना क्वार्टर।

    जान हथेली पर रखकर जर्जर भवनों में रहता है ढाई सौ पुलिस कर्मियों का परिवार

    और जानें :  # police quarter
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