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    4 साल में लगे सिर्फ 52 रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    - पानी के दोहन में आगे, सहेजने में पीछे

    शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    करीब 80 हजार आबादी और औसत 12-13 हजार मकानों वाला शाजापुर शहर बारिश के पानी को सहेजने में काफी पीछे है। आंकड़े देखें तो शहर के 100 मकान की छतों पर भी रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगे हैं। इनमें भी 52 तो सिर्फ 4 साल में ही लगे। आमजनों में जागरूकता की कमी और जिम्मेदारों की अनदेखी से यह हालात बने हैं। जानकारों की माने तो पानी को सहेजने में हम यदि इसी तरह पीछे रहे तो वे दिन दूर नहीं जब पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ेगा।

    रैन वाटर हार्वेस्टिंग एक ऐसा उपाय है, जो बारिश के पानी को जमीन में उतार सकता है लेकिन न तो आमजन अलर्ट है और न ही जिम्मेदार इस दिशा में कोई सार्थक कदम उठा रहे हैं। इस कारण अंगुलियों पर गिने जाने वाले सिस्टम ही शहर में लगे हैं। जानकार मुकेश सक्सेना बताते हैं कि एक हजार स्क्वेयर फीट की छत पर यदि सिस्टम लगा है और सामान्य बारिश होती है तो भी 70 से 80 हजार लीटर पानी जमीन में उतारा जा सकता है लेकिन वर्तमान में कम ही लोग इसके प्रति जागरूक है।

    दो से ढाई हजार का खर्च

    जानकार सक्सेना बताते हैं रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम यानि पानी की खेती। इसके जरिए हम छत पर गिरने वाली पानी की बूंद-बूंद जमीन में उतार सकते हैं। इससे भूजल स्तर बढ़ता है। एक से दो हजार स्क्वेयर फीट की छत पर भी यदि सिस्टम लगता है तो दो से ढाई हजार रुपए का खर्च ही है। 4 साल के भीतर उन्होंने 52 सिस्टम शहर में लगाए। हालांकि, शहर के मकानों की संख्या की तुलना में यह कुछ भी नहीं है।

    वरिष्ठ अभिभाषक करेंगे अलर्ट

    लखुंदर के पानी को चीलर डेम में लाने के साथ ही रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के प्रति आमजनों को जागरूक करने की दिशा में अब वरिष्ठ अभिभाषक मैदान संभालेंगे। अभिभाषक संघ संघर्ष समिति के अध्यक्ष एसकेडी सक्सेना एवं वरिष्ठ अभिभाषक सुधीरकुमार भट्ट बताते हैं वर्तमान में पानी के दोहन को रोकने के साथ ही बारिश के पानी को सहेजने की भी खासी जरूरत है। इसलिए अभिभाषक अब आमजनों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करेंगे। निवेदन करेंगे कि वे अपने घरों की छत पर सिस्टम लगवाएं। ताकि पानी के मामले में आने वाली पीढ़ी को परेशान न होना पड़े।

    और जानें :  # rain water harvesting roof
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