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    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी...अयोध्या में छाई खुशियां

    Published: Sun, 17 Sep 2017 10:00 PM (IST) | Updated: Sun, 17 Sep 2017 10:00 PM (IST)
    By: Editorial Team

    ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी

    हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्धुत रूप बिचारी

    छत्री परिसर में चल रही रामलीला में रविवार को अयोध्या में कौशल्यानंदन भगवान राम का जन्म उत्सव इन पंक्तियों के साथ धूमधाम से मनाया गया। परिसर में जमकर आतिशबाजी की गई, बधाई गीत गाने के साथ ही मिठाईयां, बताशे एवं टॉफियों का वितरण किया गया।

    रामलीला की शुरूआत इच्वाकु वंश के मनु और सतरूपा के कठोर तप से हुई। जिनकी तपस्या से प्रसन्ना होकर भगवान विष्णु ने उनके घर में पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान प्रदान किया। अगले जन्म में राजा मनु दशरथ एवं सतरूपा ने कौशल्या के रूप में जन्म लिया। राजा दशरथ के यहां कोई संतान नहीं होने के कारण वह काफी चिंतित रहते थे। इस बारे में जब वह अपने गुरु वशिष्ठ से सलाह लेते हैं तो वह पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ की सलाह देते हैं। यज्ञ के दौरान खीर उत्पन्ना होती है, जिसे राजा दशरथ अपनी चारों रानियों को खिलाते हैं। इन चारों रानियों के यहां राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। पूर्व जन्म के वरदान के रूप में कौशल्या के यहां भगवान विष्णु जन्म लेते हैं। लेकिन भगवान के जन्म के साथ ही कौशल्या कहती हैं कि आप इन चार हाथों सहित जन्म लोगे तो समाज में हमारी हंसी होगी। इसलिए आप शिशु के रूप में जन्म लें। तब भगवान विष्णु बालक के रूप में राजा दशरथ के यहां जन्म लेते हैं। राम जन्मोत्सव की खुशियां रामलीला स्थल पर धूमधाम से मनाई गईं। वहीं लंका का राजा रावण और कुंभकर्ण घोर तपस्या करते हैं तथा भगवान शिव एवं विष्णु से वरदान प्राप्त करते हैं। सोमवार को रामलीला में मुनि आगमन, ताड़का वध, मारीच सुभाहू उद्वार एवं अहिल्या उद्वार की लीलाओं का मंचन होगा।

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