Naidunia
    Sunday, July 23, 2017
    PreviousNext

    जीत गई जिंदगी : बोर में गिरा 13 महीने का चंद्रशेखर 12 घंटे बाद 'आजाद'

    Published: Fri, 17 Feb 2017 05:05 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 11:23 PM (IST)
    By: Editorial Team
    child 2017217 173114 17 02 2017

    सिंगरौली/बैढ़न। ब्यूरो। जिले में 28 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 13 महीने के मासूम बच्चे को प्रशासन ने करीब 11 घंटे तक लगातार चलाए गए बचाव अभियान के बाद शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे सकुशल बाहर निकाल लिया। जिले से 40 किमी दूर माड़ा थाने के बहेरी कलां गांव निवासी किसान बबुंदर वैश्य का एक वर्षीय बच्चा चंद्रशेखर गुरुवार शाम लगभग पांच बजे खेलते हुए घर के पास बने बने बोरवेल में गिर गया था।

    प्रशासन ने आनन-फानन एक घंटे बाद ही दो जेसीबी लगाकर बोरवेल के समानांतर खुदाई शुरू करवा दी। वहीं उसे जिंदा रखने के लिए बोरवेल में पाइप के जरिए ऑक्सीजन भी सप्लाई की जाती रही। इस बीच रेस्क्यू टीम को उस समय परेशानी का सामना भी करना पड़ा जब अचानक लाइट चली गई। हालांकि जेसीबी और अन्य वाहनों की लाइट के बीच ऑपरेशन लगातार जारी रहा। रात को जरूरत के मुताबिक दो और जेसीबी बुलवा ली गईं थीं।

    मौजूद रही डॉक्टरों की टीम, हर मूवमेंट पर रखी नजर

    इस दौरान डॉक्टरों की एक टीम पूरे समय मौके पर मौजूद रही। बच्चे की हर मूवमेंट की निगरानी की जाती रही। बच्चे के रोने की आवाज लगातार आने से लोगों में उम्मीद भी बनी रही। मौके पर तीन डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, तीन ऑक्सीजन सिलेंडर व एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी।

    रातभर रोती रही मां, गांव वाले मांगते रहे दुआ

    बोरवेल की तरफ टकटकी लगाए बैठी मां मासूम चंद्रशेखर की खैरियत मांगती रातभर रोती रही। सुबह जब बच्चा सकुशल निकला सभी लोग जोश से भर गए। बच्चे को फिलहाल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्चे की कुशलता के लिए मां-बाप सहित पूरा गांव दुआ मांगता रहा। आसपास के गांव के लोग भी इकट्ठा हो गए।

    घर वालों ने ही खुदवाया था बोरवेल

    जिस बोर में बच्चा गिरा उसे कुछ साल पहले घर वालों ने ही खुदवाया था। लेकिन असफल होने पर उसे बंद नहीं किया गया। बोरवेल यदि बंद कर दिया जाता तो यह घटना नहीं होती।

    इनका कहना है

    ऐसी घटना में 90 प्रतिशत बच्चे बचते नहीं है, क्योंकि उन्हें ऑक्सीजन व भोजन नहीं मिल पाता। लेकिन इस मामले में बोर की चौड़ाई लगभग 2 फीट थी, इस कारण बच्चे को मूवमेंट करने के साथ ही ऑक्सीजन भी मिल रही थी। गहराई कुछ कम होने से भी रेस्क्यू टीम को जल्द सफलता मिल गई।

    डॉ. पंकज सिंह, बीएमओ खुटार

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=
    • Rajbhan jaiswal 17 Feb 2017, 08:18:28 PM

      aap sabhi se kahna chahte hai ki bore well ya koi kisi bhi prakar ke bore ko dhak kar rakhe taki aisi pareshani ka samna na karna padhe or annt me jila prashasan ko dhantabaad dena chahta hu ki or ummeed karta hu ki aisi hi logo ki madad karte rahege or apna naam roshan karte rahenge. regardsRajbhan jaiswal mob-7566047455

    अटपटी-चटपटी