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    आठ माह में हो चुकी 156 नवजातों की मौत

    Published: Mon, 18 Sep 2017 12:21 AM (IST) | Updated: Mon, 18 Sep 2017 12:21 AM (IST)
    By: Editorial Team

    रीवा। नई दुनिया प्रतिनिधि

    सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में हर साल करीब तीन सौ नवजात दम तोड़ रहे हैं। इसके साथ ही प्रसूताओं की मौत का सिलसिला भी जारी है। जिले के गांधी मेमोरियल अस्पताल में जानवरी से अब तक 156 नवजात अपनी जान गवां चुके हैं। जबकि बीते साल इस समय तक करीब सवा सौ नवजात बच्चों की मौत हुई थी। डॉक्टरों के मुताबिक प्रसूताओं को समय पर चेकअप न कराना भी प्रमुख कारण है। इसके अलावा सीएचसी-पीएससी समेत जिला अस्पतालों से नार्मल डिलेवरी वाली प्रसूताओं को भी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। जिससे गांधी मेमोरियल अस्पताल के गायनिक बार्ड में बोझ बढ़ जाता है। जिसके चलते प्रसूताओं को बेहतर सुविधा नहीं मिल पाती और नवजातों की मौत हो जाती है।

    पानी की कमी बड़ी समस्या

    बताया जा रहा है कि जिन नवजात बच्चों की मां की पेट या पैदा होने के कुछ देर बाद मौत हो जाती है, ऐसे अधिकतर केस पानी की कमी वाले आते हैं। डॉक्टरों के अनुसार खान पान में लापरवाही बरतने के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा कैल्शियम, आयरन एवं प्रसूता को फिट्स आने के कारण भी बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। जिसकी बजह से उसकी मौत हो जाती है।

    इलाज में भी लापरवाही

    अस्पताल में नवजात बच्चे की मौत होने के पीछे लापरवाही को भी एक कारण माना जा रहा है। दूर दराज से आने वालों की समय पर देखभाल नहीं हो पाती है। कागजी कार्रवाई और जांच पड़ताल में कई बार समय ज्यादा लग जाता है और अस्पताल स्टाफ भी काम के बोझ बताकर लापरवाही करता है। ऐसी स्थिति में नवजात बच्चों के साथ ही प्रसूता की भी स्थिति बिगड़ जाती है।

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    प्रसूताओं में खून और पानी की कमी के साथ समय पर इलाज के लिये परिजन लेकर नहीं पहुंचते जिसके चलते स्थिति बिगड जाती है और मौत होती है। सबसे ज्यादा इस तरह के मामले सीधी जिले से आने वाली महिलाओं के सामने आ रहे हैं।

    -डॉ.कल्पना यादव, विभागाध्यक्ष

    गायनिक विभाग जीएमएच, रीवा।

    गांधी मेमोरियल अस्पताल पर स्वास्थ्य केंद्र बढ़ा रहे अनावश्यक बोझ

    समय पर चेकअप और इलाज न मिल पाने से हो रही प्रसूताओं की मौत

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