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    प्रेरकों को उनका वास्तविक हक नहीं दे रही सरकार

    Published: Wed, 13 Sep 2017 07:23 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 07:23 PM (IST)
    By: Editorial Team

    रीवा। नईदुनिया प्रतिनिधि

    साक्षार भारत योजना अंतर्गत प्रौढ़ शिक्षा के संचालन के लिए जिले के प्रत्येक ब्लाक और पंचायत स्तर पर संविदा प्रेरकों की नियुक्ति की गई थी। उन्हें प्रतिमाह 2 हजार रुपए मानदेय भी दिया जा रहा है, लेकिन अन्य राज्यों की अपेक्षा मप्र में सरकार प्रेरकों को उस स्तर का हक नहीं दे पा रही है जिसके वे हकदार हैं। धरना देकर प्रेरकों ने मांग की है कि समान कार्य, समान वेतन व्यवस्था प्रेरकों के लिए भी लागू की जाए।

    बताया गया कि स्वच्छ भारत, जनधन योजना, सर्वे मतदाता सूची आदि कार्यो में अपनी वे सेवाएं भी दे रहे हैं। लेकिन शासन द्वारा कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है। जिसके कारण प्रेरकों का भविष्य अंधकार में है। आदर्श प्रांतीय संविदा प्रेरक शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित धरना आन्दोलन में अध्यक्ष ललित कुमार तिवारी एवं सचिव धर्मराज सिंह पटेल सहित अन्य लोगों ने अपनी बात रखते हुए प्रेरकों की समस्या को लेकर आवाज उठाई है।

    प्रेरकों की ये हैं प्रमुख मांगें

    धरना दे रहे प्रेरकों की मांग है कि लोक शिक्षण केन्द्र को ग्राम पंचायत विकासात्मक गतिविधि केन्द्र तथा राज्य शासन स्तर पर चलाई जा रही जनकल्याण कारी योजनाओं का मुख्य केन्द्र बनाया जाए। मानदेय को वेतन में परिवर्तित किया जाए। उनकी नियुक्ति को स्थायीकरण किया जाए। आगामी साक्षारता कार्यक्रम में प्रेरकों की भूमिका शत-प्रतिशत रखी जाए। प्राथमिक स्तर से हाईस्कूल तक गैर शैक्षणिक कार्य प्रेरकों द्वारा कराए जाएं एवं पारितोष भी दिया जाए। इस दौरान शीला द्विवेदी, संजय कुशवाहा, प्रतिभा पाण्डेय, प्रीति गौतम, मायादेवी साकेत, निशा द्विवेदी, अर्चना द्विवेदी सहित अन्य प्रेरक मौजूद रहे।

    फोटो- 18- अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे प्रेरक।

    आयुष कार्यालय के पास प्रौढ़ शिक्षा के प्रेरकों ने दिया धरना

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