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    'पंच परमेष्ठी की आराधना से प्राप्त होता है परम पद'

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:08 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:08 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बीना। इंद्र लोगों से जिनकी महिमा का गुणगान किया गया है जिनके पंच कल्याणक होते हैं, जिन्होंने अनंत लक्ष्मी को प्राप्त कर लिया है ऐसे अरहंत ईश्वर की आराधना से हमारी श्रद्घा निर्मल होती है और परम सुख की प्राप्ति होती है। यह बात ब्रह्मचारी भैया संदीप सरल ने इटावा जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जो अष्टकर्मों का नाश करके मोक्ष स्थान में विराजमान हो गए हैं ऐसे सिद्घ प्रभु की आराधना से हमारे प्रत् येक कार्य सिद्घ होते हैं। पंचाचार का पालन करते हैं जिन शासन की प्रभावना करने वाले आचार्य परमेष्ठी कहलाते हैं। इनकी उपासना करने से हमारा चरित्र निर्मल होता है। सिद्घांत गं्रथों का समीचीन अर्थ बतलाने वाले उपाध्याय परमेष्ठी कहलाते हैं। उन्होंने कहा कि इनकी स्तुति करने से हमारे लिए निर्मल ज्ञान की प्राप्ति होती है। रत्नत्रय रूप धर्म की साधना करने वाले साधु कहलाते हैं।

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