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    कर्म के फल से कोई बच नहीं सकता : मुनिश्री

    Published: Sat, 14 Oct 2017 04:14 AM (IST) | Updated: Sat, 14 Oct 2017 04:14 AM (IST)
    By: Editorial Team

    वर्णी भवन मोराजी में विभंजनसागर महाराज के प्रवचन

    सागर। नवदुनिया प्रतिनिधि

    वर्णी भवन, मोराजी में विभंजनसागर मुनिराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म के फल से कोई बच नहीं सकता है। पुण्य कर्म के उदय से श्वान भी स्वर्ग में सुख भोगता है, लेकिन जब पाप कर्म का उदय आता है तब देव भी तिर्यंच पर्याय को प्राप्त हो जाता है। किस जीव को कौन सी गति मिलेगी यह उसके परिणामों पर निर्भर होता है।

    मुनिश्री ने बताया कि जो जीव जिस गति में जाता है उस गति में रम जाता है। कोई भी जीव मरना नहीं चाहता है। जैसे विष्टा में उत्पन्ना होने वाला कीड़ा मरना नहीं चाहता और यदि किसी से पूछो की विष्टा के कीड़ा बनना चाहते हो तो उत्तर मिलेगा नहीं। यही संसारी जीवों की अवस्था है। बहिरात्मा जीव भी बाह्य इन्द्रियों के विषयों में लगा रहता है, उसी में आनन्द लेता है और संसार में भटकता रहता है। बहिरात्मा वासना में जीता है इसलिए साधना से दूर रहता है।

    विवेकहीन व्यक्ति विचार रहित होता है

    इस संसार में कोई विवेकवान है तो कोई अविवेकी, कोई ज्ञानी है तो कोई अज्ञानी, कोई पापी है तो कोई प्रतापी है। सब तरह के लोगों से यह संसार भरा हुआ है। विवेक हीन व्यक्ति अपने पेट को कचरा घर बना लेता है जैसे कचरा पेटी में कोई भी कुछ भी सड़ा-गला, कटा-फटा डाल देते हैं उसी प्रकार अज्ञानी बहिरात्मा बस इन्द्रियों की लालसा में ही फंसा रहता है। विवेकहीन व्यक्ति विचार रहित होता है। वह बहिरात्मा जीव नाना योनियों में जन्म मरण के दुःख भोगता है। जब तक जीव बहिरात्मा बुद्घि का त्याग नहीं करता तब तक संसार के बंधनों से मुक्त नहीं हो पाता है। इसलिए अपने स्वभाव में आओ, विचार पूर्वक कार्य करो और विचार पूर्वक जिओ।

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