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    गौरैया के घोंसले न बिखरे, इसलिए नहीं बनाई छत पर जाने की पक्की सीढ़ियां

    Published: Mon, 20 Mar 2017 11:26 PM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 07:48 AM (IST)
    By: Editorial Team
    rahli sagar mp 2017321 74816 20 03 2017

    योगेश सोनी, रहली (सागर)। घर, आंगन और छतों पर फुदकने वाली गौरैया का आशियाना न बिखरे, इसलिए रहली के भारद्वाज परिवार ने अपने घर की छत पर जाने के लिए चार साल से पक्की सीढ़ियां नहीं बनाईं। उनका कहना है कि जहां से छत को जाने वाला रास्ता है, वहां पेड़ लगा है, इन पेड़ों पर चिड़ियों के घौंसले हैं, जिन्हें वे उजाड़ना नहीं चाहते।

    रहली के वार्ड सात में रहने वाले अटल भारद्वाज का कहना है कि उनके घर के दूसरे हिस्से में पेड़ लगा है। उस पेड़ पर चिड़ियों के लिए खप्पर बांधकर पानी भरना शुरू किया था। कुछ ही दिनों में सैकड़ों चिड़ियों ने इस पेड़ पर अपना बसेरा बना लिया। वर्तमान में इस पेड़ पर चिड़ियों के अनेक घोंसले हैं।

    इनकी चहचहाहट से पूरा घर गुलजार रहता है। जब ये आंगन में फुदकती हैं तो सभी का मन प्रफुल्लित हो जाता है। श्री भारद्वाज ने बताया कि करीब चार साल पहले पक्का मकान बनाया था, तब छत पर जाने के लिए इसलिए सीढ़ियां नहीं बनवाई कि उस पेड़ को काटना पड़ेगा, जहां गौरैया सहित अन्य पक्षी रहते हैं।

    आज भी सीढ़ियां बनवाने का प्लान तो करते हैं, लेकिन हर बार यह सोचकर रुक जाते हैं कि इससे गौरैया के आशियाने उजड़ जाएंगे। उन्होंने बताया कि उनका परिवार बांस की सीढ़ी (नशीने) लगाकर मकान की छत पर आता-जाता है। उन्होंने बताया कि मोहल्ले के लोग यहां पर चिड़ियों को दाना खिलाने आते हैं। स्टूडियो संचालक देवेश सोनी ने बताया की हर साल गर्मियों में चिड़ियों को पानी पीने मिट्टी के खप्पर रस्सी से पेड़ों पर बांधते हैं और उनमे पानी भरते हैं। पूरी गर्मी भर इन पक्षियों का ख्याल रखते हैं।

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