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    मंत्रोच्चार करते समय मन की एकाग्रता जरूरी : आर्यिकाश्री

    Published: Wed, 15 Nov 2017 06:24 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 06:24 PM (IST)
    By: Editorial Team

    - चातुर्मास के समापन पर आर्यिकाश्री पूर्णमति माता ने धर्मसभा में दिए प्रवचन

    खुरई। नवदुनिया न्यूज

    अतिशय क्षेत्र नवीन जैन मंदिर में चातुर्मास के समापन पर आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी ने मंत्रों की साधना पर विषय पर प्रवचन दिए। आर्यिकाश्री ने कहा कि हम किसी मंत्र का जाप करते हैं तभी मन ज्यादा मचलता है, मन में अनेक विकल्प आते हैं क्यों? क्योंकि मंत्र जाप हमारी आदत बन गया है और मंत्र जाप जब आदत बन जाता है तो मन को खुलकर खेलने का अवसर मिल जाता है। मंत्र चल रहा होता है और मन में घर की भी सोच लेते हैं, दुकान का हिसाब भी लगा लेते हैं। बगल में कोई बात कर रहा है वह भी सुन लेते हैं। इधर हाथ की माला के मोती सरकते हैं, उधर मन भी सरक जाता है। माला के मनके एक-एक करके यंत्रवत सरक रहे हैं। जिव्हा भी मंत्र का उच्चारण कर रही है लेकिन मन मंत्र में नहीं है, मन अन्यत्र घूम रहा है। मित्रों यह मंत्र जाप नहीं हुआ केवल मंत्र जाप का अभिनय हुआ।

    माताजी ने कहा कि मंत्र जाप में मन कैसे नहीं लगता। पूरे होश में मंत्र जाप करना होगा, क्योंकि जरा भी होश चूके कि मंत्र सीधा शुरू हो जाएगा। उल्टा मंत्र जाप से मन निश्चित ही एकाग्र होगा, फिर जब उल्टा मंत्र जाप भी हमारी आदत बनने लगे तो फिर कोई तीसरा प्रयोग करके देखें। बस मंत्र आदत न बन जाए, इतना ख्याल रखें। महत्वपूर्ण मंत्र नहीं, मन की एकाग्रता महत्वपूर्ण है। एक बार मंत्र अशुद्ध हो जाए कोई बात नहीं, लेकिन मन अशुद्ध नहीं होना चाहिए। मन की शुद्धि ही मंत्र की सिद्धि में कारण होती है।

    माताजी ने कहा कि मंत्र जाप का फल या उपलब्धि नहीं दिखे तो मंत्र को दोष नहीं देना, मन को दोष देना। माला तो केवल साधन है, अवलम्बन है, मुख्य तो मन है जो कि जाप के समय भी किसी न किसी पाप में उलझा रहता है। तो पापी मन परमात्मा से साक्षात्कार कैसे कर सकता है। जाप से अधिक महत्वपूर्ण है मन की एकाग्रता, तल्लीनता।

    12 घंटे आराधना की

    आर्यिका संघ के संभावित विहार की पूर्व बेला में गुरुवार को विद्याधाम तीर्थ में विशेष प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी अपने संघ सहित मंचासीन रहेंगी। इस अवसर पर समस्त नगरवासियों को आर्यिका संघ का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त होगा। प्रचार-प्रसार समिति के प्रमुख अशोक शाकाहार ने बताया कि एक बार पुनः सकल दिगम्बर जैन समाज आर्यिका संघ को शीतकालीन वाचना के लिए श्रीफल अर्पित करेगा। मंगलवार की रात्रि में सायं 6 से प्रातः 6 बजे तक संपूर्ण आर्यिका संघ ने अतिशयकारी बड़े बाबा 1008 भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में बैठकर अखंड जाप, अनुष्ठान एवं आराधना की।

    1511 एसए 157 खुरई। नवीन जैन मंदिर में प्रवचन देतीं आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी।

    1511 एसए 158 खुरई। प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

    1511 एसए 159 खुरई। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण करते श्रेष्ठीजन।

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