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    समता का भाव श्रीराम से सीखना चाहिएः अखिलेश्वरी देवी

    Published: Wed, 15 Nov 2017 06:26 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 06:26 PM (IST)
    By: Editorial Team

    - किला मैदान में रामचरित मानस सम्मेलन में विद्वानों ने दिए प्रवचन

    देवरीकलां। किला मैदान परिसर में 39 वर्ष से लगातार चल रहे मानस सम्मेलन में मंगलवार को कानपुर उरई से आई अखिलेश्वरी देवी ने रामचरित मानस पर व्याख्यान दिए। उन्होंने राम राज्य अभिषेक की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य में भगवान श्रीराम की तरह समता का भाव होना चाहिए चाहिए। जिस दिन सुबह भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक होना था, उसी दिन उन्हें गमन करना पड़ा। भगवान सुख-दुख के द्वंद्वों से दूर पिता की आज्ञा मानकर हंसते-हंसते वन की ओर गमन करते हैं। अखिलेश्वरी देवी ने कहा कि रामायण में कहा गया है कि ममता एक राम से समता सब संसार। समता से जीवन जीना वाला लाभ-हानि, सुख-दुख, मान-अपमान जैसे द्वंद्वों से रहित होकर निष्काम कर्म करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का आदर्श सभी अपनना चाहिए, क्योंकि रामराज्य की परिकल्पना को साकार से ही श्रेष्ठ समाज की स्थापना होगी। कथा के दौरान भगवान के राम राज्य अभिषेक की सजीव झांकी सजाई गई। अयोध्या से आए गोपाल दास महाराज ने भी श्रीराम चरित मानस का समाज का दर्पण बताया। महाराजजी ने कहा कि राम का चरित सभी के लिए अनुकरणीय है। भगवान श्रीराम एक आदर्श पुत्र, आदर्श पिता, आदर्श मित्र, आदर्श भाई, आदर्श राजा, आदर्श पति हैं। इनके चरित्र को अपनाकर ही हम श्रेष्ठ भारत बना सकते हैं।

    1511 एसए 151 देवरीकलां। किला मैदान में रामचरित मानस सम्मेलन पर व्याख्यान देतीं अखिलेश्वरी देवी।

    1511 एसए 152 देवरीकलां। मानस सम्मेलन में प्रवचन सुनते श्रद्घालु।

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