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    सर्वे कराने के बाद भी सरपंच-सचिवों ने नहीं बनवाए शौचालय

    Published: Tue, 21 Mar 2017 03:54 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 02:57 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    मुरैना। गांव-गांव जाकर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए जागरूक कर रहीं सरकारी टीमें गांव के सरपंच और सचिव के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इन टीमों को पता चला था कि सरपंचों ने भी अपने यहां शौचालय नहीं बनवाए हैं।

    प्रशासन शौचालय विहीन घरों में रहने वाले कर्मचारियों के वेतन काटने के आदेश पहले ही जारी कर चुका है। लेकिन प्रशासन ने उन सरपंचों पर भी कार्रवाई करने की बात कही थी, जिनके घर में शौचालय नहीं है। एक सर्वे के बाद इन सभी सरपंचों को चेतावनी भी दी गई थी कि अगर उनके घर शौचालय नहीं होगा तो वे चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। इस चेतावनी का भी सरपंचों पर असर नहीं हुआ।

    जिले की 478 पंचायतों में से करीब आधी पंचायतें ऐसी हैं, जहां सरपंच और सचिवों के घर में ही शौचालय नहीं है। अगर हैं तो सरपंच और सचिव के परिवार के लोग इन शौचालय का उपयोग करने की बजाय खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। हाल ही में कलेक्टर ने जिलेभर के गांवों में सुबह-सुबह पहुंचकर लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए अधिकारियों की टीमें बनाईं।

    इसके अलावा महिला अधिकारियों की भी दो टीम बनाई गईं। इन टीमों को पता चला कि जो सरपंच व सचिव अधिकारियों के साथ घूम रहे हैं, खुद उनके घर में शौचालय नहीं है और शौचालय होने के बाद भी उनके परिवार के लोग खुले में शौच जा रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर ने सभी सरपंचों के लिए यह निर्देश जारी किए कि वे अनिवार्य रूप से अपने यहां शौचालय बनवाएं।

    तैयार हो चुकी है सूची

    अधिकारियों द्वारा ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने के दौरान आई सरपंच और सचिवों के घर शौचालय न होने की शिकायतें प्रशासन तक पहुंची। इस पर कलेक्टर विनोद शर्मा ने सभी जनपदों को निर्देश दिए कि पंचायतों में रहे रहे सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और अन्य अधिकारी कर्मचारियों की सूची तैयार की जाए। कलेक्टर के निर्देश पर इस तरह की एक सूची तैयार भी की गई है। इसके आधार पर मार्च महीने के बाद प्रशासन लापरवाही सरपंच और सचिवों पर कार्रवाई करेगा।

    सरपंच नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, सचिवों का कटेगा वेतन

    जिला प्रशासन ने अपने एक आदेश में साफ किया था कि जिन सरकारी कर्मचारियों के घरों में शौचालय नहीं होगा, उनका वेतन तब तक के लिए रोक दिया जाएगा, जब तक कि वे लोग शौचालय नहीं बनवा लेते। इसके अलावा जो सरपंच शौचालय नहीं बनवाएंगे वो अगली बार पंचायत के चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। 31 मार्च को शौचालय निर्माण की इस सत्र की समय अवधि खत्म हो जाएगी। इसके बाद सचिवों के वेतन काटने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

    यह हैं मुख्य तथ्य

    -478 पंचायतें हैं जिले में।

    -446 करीब सचिव हैं पूरे जिले में ।

    -6 हजार के करीब पंच या वार्ड मेंबर हैं पंचायतों में।

    -456 के करीब ग्राम रोजगार सहायक हैं पंचायतों में।

    -मुरैना जनपद की 12 पंचायतें निगम क्षेत्र में आ चुकी हैं।

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