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    पढ़ाने में ढिलाई बरती तो दिया जाएगा कम्पलसरी रिटायरमेंट

    Published: Wed, 15 Nov 2017 07:36 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:36 PM (IST)
    By: Editorial Team

    सतना। नईदुनिया प्रतिनिधि

    शासन का पत्र आते ही उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। कल तक कॉलेजों में पदस्थ प्रोफेसर अध्यापन के कार्य से विरत होकर आराम फरमाते थे लेकिन शासन के पत्र के बाद उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी हैं। हो भी क्यों न, शासन ने अपने मंसूबे स्पष्ट कर दिए हैं। शासन स्तर पर भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है कि जिनकी 20 साल की सेवा अवधि पूरी हो गई है या 50 के पार उम्र हुई है और उनके अध्यापन में गुणवत्ता नहीं है ऐसे लोगों की ग्रेडिंग कर उन्हें कम्पलसरी रिटायरमेंट दिया जाए। इसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक रीवा डॉ. विनोद श्रीवास्तव ने सर्वे भी शुरू कर दिया है। रीवा व शहडोल संभाग के कुल 66 शासकीय कॉलेजों में सर्वे कार्य शुरू किया जा चुका है। इसकी रिपोर्ट 31 जनवरी 2018 तक शासन को भेजी जानी है।

    इन मापदंडों पर होगा सर्वे

    उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो जिस सर्वे की बात शासन कर रहा है उसमें प्रतिवर्ष लिखे जाने वाले सीआर को भी दृष्टिगत रखना अनिवार्य है। शारीरिक क्षमता, मेडिकल बोर्ड की फिटनेस व उनके द्वारा शैक्षणिक संस्थान में किए जाने वाले कार्य का मूल्यांकन किया जाना है। इसके लिए टीम गोपनीय स्तर पर गठित की गई है। एडी कार्यालय से रीवा व शहडोल में पदस्थ कुल 350 प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक के सीआर को इकठ्ठा कर सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है।

    बद से बदतर होगी स्थिति

    वर्तमान में रीवा व शहडोल संभाग में कुल 66 कॉलेज हैं। इसमें 350 रेगुलर पद भरे हुए हैं जबकि 452 पद खाली हैं। दोनों ही संभाग में प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापक की कुल 802 पद हैं। खाली पदों की पूर्ति उच्च शिक्षा विभाग अतिथि विद्वान के जरिए करता है। अगर इस फार्मूले के तहत कुछ लोगों को कम्पलसरी रिटायरमेंट दिया गया तो विभाग ने रेग्युलर प्राध्यापकों की संख्या में कमी आएगी।

    आदेश का दिखने लगा असर

    उक्त आदेश आने के बाद ही प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापक एडी कार्यालय रीवा के चक्कर काट रहे हैं। इनमें उन प्राध्यापकों की संख्या ज्यादा है जो कि शासन के रहमोकरम पर प्रभारी प्राचार्य की भूमिका पर कार्यरत हैं। प्राचार्य की भूमिका का निर्वहन करने पर उन्हें दो तरह के कार्यो से छूट मिल जाती थी। पहला उन्हें अध्यापक का कार्य नहीं करना पड़ता था, साथ ही उन्हें परीक्षा ड्यूटी या अन्य ड्यूटी से भी बचत मिलती थी। लेकिन सर्वे में यह साफ कहा गया है कि प्राध्यापक यानि रेग्युलर अध्यापन कराने वाले प्राध्यापक।

    .........

    आदेश आने के बाद प्राध्यापकों की सीआर इकट्ठा कर ली गई है। जानकारी तैयार की जा रही है। जानकारी के आधार पर वह सूची शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर पर ही निर्णय लिया जाना है।

    -डॉ. विनोद श्रीवास्तव, एडी उच्च शिक्षा रीवा।

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