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    किसान ने 16 बार मुआवजे के लिए दिया आवेदन, अधिकारी बोले करा लेते हैं जांच

    Published: Wed, 15 Nov 2017 08:26 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 08:26 PM (IST)
    By: Editorial Team

    सतना। नईदुनिया प्रतिनिधि

    आवेदन पर आवेदन देने के बाद किसान परेशान हताश हो जाते हैं। लेकिन अगर इस बीच कोई हताश नहीं होता है तो वह है अधिकारी। प्रत्येक शिकायत पर जांच कराने की बात कहकर शिकायत पत्र को भी रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। कुछ इसी तरह का मामला इन दिनों कोटर तहसील में देखने को मिल रहा है। जहां किचवरिया निवासी रामनरेश त्रिपाठी अब तक कुल 16 बार आवेदन देकर खुद के पैतृक जमीन के मुआवजा दिलाने की मांग कर चुके हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण उनका मुआवजा सह खाताधारक को भुगतान कर दिया गया है। अधिकारी आवेदन लेकर जांच कराने की बात कहते नजर आ रहे हैं। जिस जमीन का मुआवजा श्री त्रिपाठी मांग रहे हैं वह जमीन उनकी है। विभाग द्वारा जारी कराया गया धारा 7 के प्रकाशन में भी यह माना गया है। बावजूद इसके भुगतान उन्हें न कर दूसरे को कर दिया गया है।

    मिलीभगत कर हड़प लिया मुआवजा

    कोटर तहसील के ग्राम किचवरिया निवासी रामनरेश त्रिपाठी पुत्र स्व. जगन्ननाथ त्रिपाठी व सह खाताधारक रामकलेश त्रिपाठी से मौके पर स्थित रकवे में से 25-25 डिस्मिल रकबे का अधिग्रहण किया गया था। जिसकी नोटिस भी जारी की गई थी। मुआवजे के तौर पर 78 हजार रुपए की राशि भी बनाई गई थी। एक तरफ जहां रामनरेश त्रिपाठी अपने मुआवजे का इंतजार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ रामकलेश त्रिपाठी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मुआवजा हड़प लिया था जिसमें तहसील कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध थी।

    जांचकर्ता की भूमिका संदिग्ध

    कोटर के पूर्व एसडीएम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शिकायत की जांच केपी मिश्रा से कराई थी। केपी मिश्रा ने बगैर जांच किए ही अपनी रिपोर्ट सम्मिट नहीं की गई थी। जबकि किसान रामनरेश त्रिपाठी को मौखिक जानकारी दी गई थी कि उनके सह खाताधारक रामकलेश त्रिपाठी ने मुआवजा राशि ले लिया है। मौके पर तैयार किया गया पंचनामा एवं जांच पत्रक मांगे जाने पर उसने जांच रिपोर्ट तहसील में जमा करने की बात कहकर एसडीएम से संपर्क करने की बात कही। तहसील अधिकारी ने उक्त प्रकरण की जांच प्रतिवेदन की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगे जाने पर किसान रामनरेश त्रिपाठी को पता चला कि उसने जांच रिपोर्ट ही जमा नहीं किया है।

    हो सकता है बड़ा खुलासा

    ग्राम किचवरिया से निकलने वाली बाणसागर की नहर में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण करने का काम किया गया था। अधिग्रहण के समय धारा 7 का प्रकाशन किया गया था। अगर किसान रामनरेश त्रिपाठी के प्रकरण की सच्ची जांच कराई गई तो बड़े पैमाने पर इंजीनियर केके मिश्रा द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। लिहाजा बाणसागर एवं राजस्व के अधिकारी मिलकर मामले को दबाने का काम कर रहे हैं।

    ...........

    मेरे पास अभी तक कोई ऐसी शिकायत नहीं पहुंची है। मामले की शिकायत मेरे पास आयेगी तो मैं उसकी जांच करवाकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करूंगा।

    -शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम रामपुर बाघेलान।

    यह तो गलत है। जिन्होंने यह त्रुटि की गई है उनसे वसूली कर पीड़ित किसान को मुआवजे की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। टीम भेजकर स्थल पंचनामा के साथ कार्रवाई कराई जाएगी। जिन लोगों ने कार्रवाई के लिए विभागीय स्तर पर लिखा जाएगा।

    -जेपी धुर्वे, एडीएम सतना।

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