Naidunia
    Saturday, November 25, 2017
    PreviousNext

    रीवा पहुंचा जीआरपी थाना, सतना के हाथ सिर्फ जीरो कायमी

    Published: Wed, 15 Nov 2017 08:39 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 08:39 PM (IST)
    By: Editorial Team

    अम्बिका केशरी

    सतना। नईदुनिया प्रतिनिधि

    रेलवे स्टेशन व ट्रेन की सुरक्षा का जिम्मा जीआरपी के पास है। लेकिन जीआरपी में स्टाफ की कमी होने से इन्हे सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पिछले कई वर्षो से सतना जीआरपी में स्टाफ की भारी कमी है। स्टाफ बढ़ाए जाने को लेकर कई बार अधिकारियों से मांग भी की गई। जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानकार हालातों को सुधारने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से जीआरपी को पुलिसिंग का संचालन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है। जीआरपी की मानें तो उन्हें 20 स्टाफ की जरूरत है।

    अंग्रेजों के जमाने की है जीआरपी चौकी

    सतना की जीआरपी चौकी अंग्रेजों की जमाने की है। समय के साथ यात्री रेलगाड़ियों की संख्या बढ़कर 210 से ऊपर हो गई और जीआरपी का कार्यक्षेत्र हरपालपुर व ठहेरका तक हो गया। इस दौरान सतना जीआरपी मुट्ठी भर जवानों व सीमित सुविधाओं के बूते रेल अपराध नियंत्रण में कारगर भूमिका निभाती रही, बावजूद इसके रेलवे ने इनकी सुध नहीं ली। सकरी गली जैसी जगह पर जीआरपी जवानों को रेलवे ने जो स्थल दिया है, वह चौकी कम लॉकअप ज्यादा नजर आता है। जवान जब विभागीय मीटिंग के लिए एकत्र होते हैं तो तंग कमरे में ऐसा महसूस करते हैं, मानो वे स्वयं लॉकअप में हों। रेलवे ने इन जवानों को इतनी भी जगह मुहैया नहीं कराई है, जितने में वे सुकून से बैठकर कार्यालयीन काम निपटा सकें। जंक्शन की जीआरपी चौकी से बेहतर तो मैहर जीआरपी चौकी है, जहां कम से कम जवानों के बैठने की जगह तो है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से राजकीय रेल पुलिस ने प्रदेश को तीन हिस्सों में विभक्त कर रखा है। ये जिले जबलपुर, भोपाल व इंदौर है। सतना व रीवा स्टेशन जीआरपी के जबलपुर जिले में आते हैं।

    सतना जीआरपी का कटनी से होता है नियंत्रण

    फिलहाल सतना जीआरपी को कटनी जीआरपी नियंत्रित करती है। सतना जीआरपी से उचेहरा, लगरगवां, सतना, सगमा, हाटी, जैतवारा, खुटहा, चितहरा, मझगवां, डभौरा, मझियारी, हरपालपुर, टेहरका, निवाडी, कैमा, सकरिया, हिनौता रामवन, बगहाई, तुर्की रोड तथा रीवा रेल्वे स्टेशन क्षेत्र नियंत्रित होता है। जबकि मैहर में अलग चौकी है जहां से मैहर-कटनी रेलखंड की सुरक्षा नियंत्रित होती है। अभी सतना जीआरपी अपने कार्यक्षेत्र में घटने वाली वारदातों को जीरो में कायम करती थी और कटनी जीआरपी थाने से अपराध क्रमांक लेकर आगे की कार्रवाई करती थी। रेलवे की नई व्यवस्था में भी जीआरपी के हाथ 'जीरो में कायमी' ही हाथ आएगी।

    यूं रीवा पहुंचा थाना

    सतना जीआरपी चौकी के थाने के रूप में उन्नयन की मांग बेहद पुरानी है। कई मर्तबा सांसद गणेश सिंह भी सतना जीआरपी चौकी को थाने के रूप में उन्नयन करने पत्र लिख चुके हैं। रीवा में जीआरपी थाना बनाने की पहल तत्कालीन विस अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के समय शुरू हुई थी। बाद में जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने लगातार प्रयास किए और सतना जीआरपी चौकी का थाने में उन्नयन होने के बजाय रीवा को जीआरपी थाना बनाने पर मुहर लगा दी गई।

    आरपीएफ की तरह सुविधा मिलनी चाहिए

    जीआरपी का कहना है कि रेलवे के अधिकारी अगर आरपीएफ की तरह सुविधा मुहैया करा दें तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। क्योंकि आरपीएफ के पास न तो जगह का अभाव है और न ही स्टाफ की कमी है।

    जीआरपी में मौजूदा स्टाफ

    उपनिरीक्षक -01

    सहायक उपनिरीक्षक - 03

    हवलदार -08

    प्रधान आरक्षक 08

    आरक्षक -18

    महिला आरक्षक - 01

    .....

    स्टाफ की कमी होने की वजह से ट्रेन में पेट्रालिंग समेत सर्कुलेटिंग एरिया, प्लेटफार्म में गश्त करने में काफी दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा इतनी छोटी सी जगह पर बैठकर काम करने में काफी परेशानी होती है। समस्या के संबंध में कई बार रेलवे को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

    -संतोष कुमार तिवारी, जीआरपी चौकी प्रभारी।

    और जानें :  # Satna News
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें