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    सीहोर के पथरिया गांव में किसान ने फांसी लगाकर दी जान

    Published: Tue, 04 Jul 2017 12:17 PM (IST) | Updated: Wed, 05 Jul 2017 01:06 PM (IST)
    By: Editorial Team
    farmer suicide pathariya village 201774 121949 04 07 2017

    सीहोर, दोराहा। जिले में किसानों की आत्महत्या करने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को एक और किसान ने कर्ज के तनाव के चलते फांसी लगा ली। किसान पर बैंक, सोसायटी सहित साहूकारों का करीब 12 लाख रुपए का कर्ज था। इसी कर्ज के चलते वह लंबे समय से तनाव में था। एक माह में जिले के दस किसान कर्ज के तनाव में आत्महत्या कर मौत को गले लगा चुके हैं।

    जानकारी अनुसार के अहमदपुर थाने के ग्राम पथरिया निवासी 50 वर्षीय सूरज सिंह गुर्जर सोमवार रात से घर से लापता था। किसान सूरज सिंह को परिजन खोज ही रहे थे। मंगलवार सुबह परिजनों को सूरज सिंह का शव गांव के पास जंगल में एक इमली के पेड़ पर लटका मिला। मृतक किसान के परिजनों ने बताया कि मृतक पर बैंक, सोसाइटी सहित साहूकारों का करीब 12 लाख कर्ज था और इन्हीं कारणों से किसान सूरज सिंह मानसिक तनाव में रहता था। मृतक किसान परिवार का मुखिया था। उसकी पांच भाइयों के शामिल खाते में करीब 45 एकड़ जमीन है। परिजनों के मुताबिक पिछले तीन साल से फसल भी बिगड़ रही थी।

    साहूकार और बैंक वाले कर्ज चुकाने कर रहे थे परेशान

    मृतक के भाई पूर्व सरपंच जसवंत सिंह गुर्जर ने बताया कि मेरे बड़े भाई सूरज सिंह सोयाबीन की फसल लगातार खराब होने तनाव में थे। उन्होंने साहूकारों, बैंक और सोयाइटी से करीब 12 लाख रुपए का कर्ज ले रखा था। एक ट्रेक्टर भी बैंक से कर्ज लेकर उठाया। कर्ज चुकाने के लिए साहूकार और बैंक के कर्मचारी लगातार दबाव बना रहे थे। इस कारण से वह पिछले कुछ दिनों से परेशान थे।

    बीस एकड़ में सोयाबीन की बोवनी हो गई थी खराब

    मृतक किसान के भाई सजवंत सिंह ने बताया कि इस साल करीब 20 एकड़ में सोयाबीन की बोवनी की थी। लेकिन बारिश नहीं होने कारण वह खराब हो गई। इस कारण भी सूरज सिंह पिछले कुछ दिनों से परेशान था।

    तीन बेटियां और दो बेटे

    मृतक किसान सूरज सिंह के चार भाई है जसवंत सिंह, लखन सिंह, गजराज सिंह, रामस्वरूप सिंह। वहीं तीन बेटियां और दो बेटे है। इनमें से दो बेटे और दो बेटियों की शादी हो चुकी है। एक बेटी की शादी सूरज सिंह ने पिछली साल की थी। वहीं एक सबसे छोटी बेटी की शादी नहीं हुई है।

    एक माह में दस किसानों की मौत

    एक माह में दस किसान कर्ज के तनाव में आत्महत्या कर चुके हैं। इसमें चार किसानों ने फांसी के फंदे पर झूल कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। वहीं 6 किसानों ने साल्फास सहित अन्य जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की है।

    कर्ज के तनाव में यह किसान कर चुके हैं आत्महत्या

    - 8 जून को इछावर के ग्राम जोगड़ाखेड़ी के किसान विजय सिंह सूर्यवंशी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस पर पांच लाख का कर्ज था।

    - 12 जून को रेहटी के ग्राम जंजना में किसान दुलीचंद कीर ने जहरीला पदार्थ खा कर आत्महत्या कर ली। इस पर करीब पांच लाख का कर्ज था।

    - 15 जून को आष्टा के ग्राम बापचा बरामद में किसान खाजू खां ने खाद बीज की किल्लत के चलते पेड़ पर फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी।

    - 15 जून को नसरुल्लागंज के ग्राम लाचौर में 23 वर्षीय किसान मुकेश पिता शिवराम यादव ने जगह खा कर आत्महत्या कर ली थी। मुकेश पर करीब 5 लाख रुपए का कर्ज था।

    - 18 जून को श्यामपुर तहसील के ग्राम जमोनिया खुर्द में बंसीलाल पिता हिरालाल उम्र 50 साल ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। बंसीलाल पर करीब 9 लाख रुपए का कर्ज था।

    - 22 जून को बुधनी के ग्राम गुआड़िया के किसान शत्रुघन मीणा ने साहूकार के कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। शत्रुघन ने एक सूदखोर भाजपा नेता से 5 लाख रुपए कर्ज लिया था।

    -22 जून को इछावर के ग्राम पालखेड़ी के किसान बाबूलाल मालवीय ने साल्फास खा कर आत्हत्या कर ली थी। बाबूलाल पर करीब बैंक, सोसाइटी और फाइनेंस कंपनी का करीब ढ़ाई लाख रुपए का कर्ज था।

    - 28 जून को सीहोर के ग्वालटोली निवासी किसान जगदीश पिता नारायण यादव ने सोयाबीन की फसल खराब होने और कर्ज चुकाने के तानव में जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। उसका शव संदिग्ध हालत में खेत पर मिला था।

    - 29 जून को सीहोर के ग्राम इमलीखेड़ा के 55 वर्षीय किसान महेरिया पिता गोपाल सिंह बारेला ने गमछे से फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली थी। महेरिया पर करीब एक लाख रुपए का कर्ज था। इसके बाद मंगलवार को अहमपुर के ग्राम पथरिया में सूरज सिंह ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली।

    प्रशासन ने एक भी किसान मौत का कारण कर्ज को नहीं माना

    जिले में कर्ज के कारण तनात में चल रहे किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने एक भी किसान की मौत को कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने कारण नहीं माना है। प्रशासन किसानों की मौत को निजी और परिवारिक कारण बता रहा है। प्रशासन की जांच की सुई किसानों के कर्ज और फसल खराब होने के कारणों की ओर घूम ही नहीं रही है। कांग्रेस किसानों की मौत को राजनैतिक मुद्दा बनाने में जुटी हुई है।

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