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    सोयाबीन की फसलों पर इल्लियों का हमला, सूखने लगी फसल

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:05 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:05 AM (IST)
    By: Editorial Team

    2009 के बाद पहली बार मानसून की बेरूखी, फली को चट कर रही है इल्लियां

    फोटो 163 आष्टा। इस प्रकार सोयाबीन की फली को इल्लियां कर रही चट।

    फोटो 164 आष्टा। किसान खेत में बारिश न होने से खराब फसल दिखाते हुए।

    फोटो 165 आष्टा। कुछ खेतों में इस प्रकार लहलहा रही है फसल।

    आष्टा । नवदुनिया न्यूज

    पहले अल्पवर्षा और फिर भारी बारिश की मार झेल चुके किसानों के लिए प्राकृतिक आपदा के बाद अब नई मुसीबत एक तरफ मानसून की बेरूखी तो दूसरी तरफ फसल पर इल्लियों का हमला है। कुछ ही किसानों के खेतों में सोयाबीन की फसल शानदार नजर आ रही है। पहली बार इतनी इल्लियों का हमला होने से किसान हैरान परेशान व उनके होश तक उड़े हुए हैं। कीटनाशक दवाएं भी असर नहीं कर रही हैं। कृषि विभाग का अमला किसानों को उचित सलाह भी नहीं दे रहा है।

    इस बार किसानों ने सोयाबीन की फसल बिते वर्षानुसार ही अत्याधिक बोई है। जुलाई माह में फसल दम तोड़ रही थी, लेकिन इन्द्र देवता की कृपा से बारिश होने पर इन फसलों में नई जान अर्थात समय पर ऑक्सीजन मिलने से बर्बाद हो रही फसल बच गई। रिमझिम बारिश से फसलों को सहारा मिला, लेकिन अचानक क्षेत्र में किसानों के खेतों में हजारों हेक्टेयर फसलों पर इल्लियों ने हमला बोल दिया। किसान कीटनाशक दवा का छिड़काव भी करने लगे, लेकिन दवा का असर जो होना चाहिए था वह नहीं हों पाया। अनेक किसानों के खेत में फसल इल्लियों के प्रकोप से बच नहीं पा रही है। ग्राम पारदीखेड़ी में 13 अगस्त को हमारे प्रतिनिधि ने किसानों के बीच खेतों में जाकर इल्लियों के प्रकोंपों को देखा। किसानों का कहना था कि इतनी बड़ी इल्लियां उन्होनें पहले कभी नहीं देखी। हमने दवाइयां भी डाली, लेकिन इल्लियों का कोई असर नहीं हुआ। सोयाबीन में से इस समय तंबाकु की इल्ली, फौजी कीट व अर्धगुडलक हरी इल्ली का प्रकोप है। इन इल्लियों में तंबाकू की इल्ली पत्तियों से पूर्णहरित को कूरेज कर खा रही हैं। यह रात में निकलती हैं ओर दिन में छिप जाती हैं। फौजी कीट की इल्ली पत्तियों से सिर्फ शिराओं को छा़ेडकर शेष भाग को छा़ेडकर नष्ट कर रही हैं। अधिक गंभीर अवस्था में यह कीट सोयाबीन की फसलों को भी खा रही है। इसके अलावा एक फफूंद जैसा होने वाल पर्ण चित्ती रोग का संक्रमण भी सोयाबीन की फसलों पर हो चुका है। इस संक्रमण के कारण पत्तियों पर भूरे रंग के व गहरे रंग के गोल धब्बे बन रहे हैं जो आगे चलकर फलियों पर भी बनेंग, जो फसलों को नुकसान भी पंहुचाएंगें। ग्राम पारदीखेड़ी के अजयसिंह, विक्रमसिंह, सुरजसिंह, मानसिंह, रायसिंह ठाकुर, जीवनसिंह, शेरसिंह, ज्ञानसिंह आदि ने बताया कि हमारी फसलें इल्लियों के प्रकोप व बारिश समय पर न होने के कारण प्रभावित हो रही है। मानसून सीजन के दौरान आठ साल में सबसे कम बारिश हुई है। अभी तक 360 एमएम बारिश हुई है, जबकि बीते वर्ष 947 के करीब बारिश हुई थी।

    इस बार भी दो दिन मनेगी जन्माष्टमी

    जगदीश्वर धाम मंदिर में सवामाह तक श्रीकृष्ण झूले में रहेंगे

    फोटो 166 आष्टा। कृष्णजी के लिए सामग्री खरीदते हुए।

    आष्टा । नवदुनिया न्यूज

    करीब तीन दशक के बाद विशेष योग के साथ आजादी के दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पूरे देश में जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। उसे 15 अगस्त के दिन ही मनाएंगे। हालांकि इस बार भी जन्माष्टमी नगर में दो दिनों तक मनाई जाएगी। स्मति मतावलंबियों की जन्माष्टमी पर्व सोमवार 14 अगस्त को व वैष्णव धर्मावलंबियों द्वारा मंगलवार 15 अगस्त को पर्व मनाया जाएगा। इससे पहले 1987 में 15 अगस्त के दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया था। नगर में अधिकांश लोग 15 अगस्त को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगें, जिसके लिए बाजार में खरीददारी भी प्रारंभ कर दी गई है।

    खास बात यह रहेगी कि 15 अगस्त की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म के समय न अष्टमी तिथि होगी ओर न ही रोहिणी नक्षत्र। नगर पुराहित पंडित मनीष पाठक के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि अष्टमी की बैला में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। लेकिन इस बार दोनों ही योग नहीं मिल रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र 16 अगस्त को सुबह 2.32 बजे प्रवेश करेगा। जन्माष्टमी में जहां सुबह से राष्ट्रीय पर्व के साथ अपने श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा। 15 अगस्त के दिन जन्माष्टमी का पर्व होने के कारण इस बार श्रीकृष्ण की आकर्षक झाकियों में राष्ट्रीय पर्व भी नजर आएगा। वहीं मंदिरों को भी विशेष रूप से सजाया जा रहा है। वर्ष 2014 में रोहिणी की बजाय कृतिका नक्षत्र में जन्माष्टमी का पर्व शाम 7.48 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रवेश है जो मंगलवार शाम 5.42 मिनट तक रहेगी, ऐसे में कुछ लोग 14 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मनाएंगे। वहीं वैष्णवजन सूर्योदस तिथि अष्टमी वाले दिन अर्थात 15 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। इस दिन की मध्य रात में नवमी तिथि व कृतिका नक्षत्र में कृष्ण भगवान का जन्म होगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्घी योग सुबह से रात ढाई बजे तक रहेगा।

    जन्माष्टमी के दिन यह करें

    ज्योतिषाचार्य डॉ. दिपेश पाठक के अनुसार 15 अगस्त के दिन नगर के गंज स्थित जगदीश्वर धाम राधाकृष्ण मंदिर में सवामाह तक झूले में भगवान को प्रतिदिन विधिवत पूजा व अभिषेक कर जन्माष्टमी के दिन से कार्यक्रम किए जाते हैं। इस पर्व पर सुबह महाभिषेक कर रात्री में महिलाओं द्वारा संगीत में भजनों के बाद तुलसीमानस मंडल द्वारा भजन कीर्तन कर महाआरती की जाएगी। इस पर्व पर भगवान को पीले पुष्प अर्पित करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है। दक्षिण वर्णी शंख में जल भरकर श्रीकृष्ण का अभिषेक करने से मनोकामनाऐं पूर्ण होती है। श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाने से मान सम्मान में वृद्घि होगी। गरीबों व असहायों को फलाहार कराने से रोगों का नाश होगा। इसके साथ ही इस दिन श्रीकृष्ण आराधना का विशेष महत्व होता है।

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