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    600 की जगह दो हजार में बन रहे ड्राइविंग लायसेंस

    Published: Fri, 02 Dec 2016 04:01 AM (IST) | Updated: Fri, 02 Dec 2016 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team

    सीहोर। जिला परिवहन कार्यालय में ऑन लाइन लायसेंस बनवाने की फीस लर्निंग की 170 और स्थाई लायसेंस के लिए 390 रुपए शुल्क लगता है। साथ ही आवेदन के साथ लगने वाले दस्तावेज में 20 से 30 रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दलालों के माध्यम से दो प्लस चार पहिया वाहन का लायसेंस बनवाने में 1800 से 2000 रुपए लोगों को देने पड़ते हैं। ऐसा नहीं है कि अफसरों की इसकी भनक नहीं है। आरटीओ कार्यालय में बाबू से लेकर आरटीओ तक हर टेबल का दाम तय है। लायसेंस के लिए जब आम आदमी ऑनलाइन आवेदन करके आरटीओ दफ्तर आता है, तो उसे कई चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन लायसेंस नहीं बनता है।

    जानकारी के अनुसार आरटीओ कार्यालय में हर सप्ताह 800 से 1000 दो और चार पहिया सहित हैवी लायसेंस बनते हैं। इसमें कई लोग ऐसे होते हैं जो ऑनलाइन आवेदन करके सीधे आरटीओ कार्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन टेब टेस्ट में फेल होने के बाद या अन्य कारणों से उनका लायसेंस नहीं बन पाता, जिससे दूसरी बार वह मजबूरी में दलाल के माध्यम से ही लायसेंस बनवा लेते हैं। आरटीओ कार्यालय में काम करने वाले एजेंटो का कहना है कि यहां हर टेबल पर पैसा देना होता है। यही कारण है कि हर काम के लिए दो से तीन गुना अधिक राशि लोगों को देना पड़ती है। इसको लेकर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोग आरटीओ कार्यालय में बहस करते देखे जा सकते हैं।

    हर काम के रेट तय

    ऑनलाइन 2 प्लस 4 पहिया वाहन के लर्निग और स्थाई लायसेंस की फीस 560 रुपए हैं, लेकिन देने पड़ रहे 1800 से 2000 रुपए। वाहन ट्रांसफर का शुल्क 390 पर दलालों से कराने पर 1 हजार रुपए, एनओसी 240 की जगह करीब 1 हजार रुपए, हैवी लायसेंस लर्निंग प्लस स्थाई के 780 रुपए और लिए जाते हैं 5 से 6 हजार रुपए। चार पहिया वाहनों की फिटनेस ऑनलाइन फीस 320 की जगह 15 से 16 सौ रुपए लिए जा रहे हैं। वहीं लायसेंस रिन्यू करने के लिए 390 रुपए की जगह एक हजार से 12 सौ रुपए तक लिए जाते हैं।

    किन-किन के पास जाना होता है लायसेंस बनवाने

    ऑन लाइन कियोस्क में लायसेंस के लिए आवेदन करने के बाद सबसे पहले टेब-टेस्ट देना होता है, उसके बाद पास होने पर कम्प्यूटर शाखा में जाकर फोटो खिचाना होता है। इसके बाद लर्निंग लायसेंस शाखा में जाकर सातवे दिन लर्निंग लायसेंस मिल जाता है। इसके बाद जिस तारीख में अपायमेंट मिला था 30 दिन बाद उसी तारीख को स्थाई लायसेंस के लिए अलग बाबू से मिलना होता है। इसके बाद आरटीओ ड्राइविंग टेस्ट लेता है, उसमें पास होने पर 5 दिन बाद डाक से लायसेंस आवेदक के घर भेज दिया जाता है, लेकिन दलालो के माध्यम से बनवाने पर दो बार ही आरटीओ जाना पड़ता है और दलाल लायसेंस हाथ में दे देता है।

    दलाल खुद ले लेते हैं लायसेंस

    यदि हम नियम की बात करे तो आवेदक से आरटीओ द्वारा ड्राइव टेस्ट लेकर पास होने पर पांच दिन में लायसेंस तैयार कर आवेदक को पोस्ट कर दिया जाता है, लेकिन स्थाई लायसेंस को पोस्ट न करते हुए दलाल को दे दिया जाता है, जो आवेदक से पैसे लेकर उसे दे देता है।

    .....

    केस -1

    एलआईसी कॉलोनी निवासी मनीष मंगरोलिया ने एक साल पहले चार और दो पहिया वाहन के लायसेंस बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। लेकिन जब टेस्ट में फेल हो गया तो बाद में एक एजेंटी को 1800 रुपए दिए। इसके बाद टेस्ट में पास हो गया और मेरे पास सात दिन में लर्निंग और उसके एक माह बाद एजेंट ने मुझे स्थाई लायसेंस बना कर हाथ में थमा दिया। रुपए जरूर लग गए लेकिन परेशानी बिल्कु नहीं हुई।

    केस-2

    आष्टा के ग्राम वैदाखेड़ी निवासी आकाश नरवरिया ने चार माह पहले ड्राइविंग लायसेंस के लिए आवेदन किया था। डेट मिलने के बाद आरटीओ कार्यालय गया। लेकिन मैं टेस्ट में फेल गया। इसके बाद एक दलाल मुझे दो हजार रुपए में लायसेंस बनवाने बात की। उसने कहा जब लायसेंस आ जात तब रुपए देना है। मैंने सोचा कि पहले रुपए भी खर्च हुए और परेशान भी हुआ फिर लायसेंस नहीं बना। लेकिन दलाल को दो हजार रुपए देने पर टेस्ट में भी पास हो गया और लायसेंस भी आसानी से बन गया।

    नहीं लिए जाते ज्यादा पैसे

    शासन द्वारा जो शुल्क निर्धारित किया गया है, आवेदकों से वहीं शुल्क लिया जाता है। दलाल किससे कितने पैसे लेते हैं हमें इसकी जानकारी नहीं है।

    प्रमोद कापसे, आरटीओ सीहोर

    और जानें :  # sehore news
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