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    विद्वानों का सपना, चहुंओर हो हिंदी का बोलबाला

    Published: Wed, 13 Sep 2017 08:01 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 08:01 PM (IST)
    By: Editorial Team

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    - वर्तमान में हिंदी की स्थिति से चिंतित हिंदी विद्वान

    शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    मातृ भाषा होने के बाद भी हिंदी को हजारों साल बाद भी वह स्थान नहीं मिल पाया जिसकी वह हकदार है। युवा पीढ़ी शुद्ध हिंदी लिखना, बोलना तक नहीं जानती। आम बोलचाल में हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू की खिचड़ी चल रही है। कार्यालयों में तमाम निर्देशों के बावजूद पूरी तरह हिंदी स्थापित नहीं हो सकी। समाज, व्यवसाय सभी जगह हिंदी अपने हक के लिए लड़ रही है। हालात यह है कि अगर कोई शुद्ध हिंदी का उपयोग करे तो उसे अजीब तरह से देखा जाता है। हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दिया जा रहा जो ठीक नहीं है। यह चिंता हिंदी की अच्छी-खासी समझ रखने वाले विद्वानों की है। उनका कहना है कि हिंदी को बढ़ाने के लिए सभी को बीड़ा उठाना पड़ेगा।

    बीएसएन कॉलेज प्रभारी प्राचार्य और हिंदी भाषा के लिए सतत साधना कर रहे डॉ. वीके शर्मा के अनुसार हिंदी भाषा महाकवि तुलसीदास, सूरदास, मलिक मोहम्मद जायसी, कबीर की तपस्या है। भारतेंदु हरिशचंद्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत जैसे साहित्यकारों ने हिंदी को समृद्ध किया है। सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की विराट चेतना ने हिंदी को सशक्त बनाया है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने समालोचना के द्वारा इसका मान बढ़ाया है। डॉ. रामविलास शर्मा ने दिगदगंत में हिंदी की प्रतिष्ठा की है एवं फादर कामिल बुल्के जैसे विदेशी विद्वान द्वारा हिंदी भाषा का गौरव बढ़ाया गया है।

    -डॉ. वीके शर्मा, प्रभारी प्राचार्य लीड कॉलेज

    इनके द्वारा लिखे गए 100 व्यंग लेख, 25 शोध लेख, 50 कविताएं एवं 25 आलेख विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। 5 वार्ताएं आकाशवाणी इंदौर से प्रसारित हुई हैं। इसके साथ ही 5 विद्यार्थी डॉ. शर्मा के निर्देशन में पीएचडी कर चुके हैं। पांच विद्यार्थी वर्तमान में कर रहे हैं। इनके द्वारा एक ग्रंथ को प्राकृत भाषा से संस्कृत और संस्कृत से हिंदी अनुवाद किया गया है। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए डॉ. शर्मा काफी प्रयासरत रहते हैं। वे विभिन्ना अवसरों पर विद्यार्थियों को हिंदी का महत्व बताने के साथ हिंदी के शुद्ध लेखन, उच्चारण आदि के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। 1993 से वे अध्यापन कार्य में संलग्न हैं। संस्कृत में पीएचडी, हिंदी में एमए करने के साथ संगीत गायन में भी उपाधि हासिल की है।

    फोटो : 13एसजेआर20 कैप्शन- डॉ. वीके शर्मा।

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    -डॉ. दशरथ मसानिया, शासकीय शिक्षक

    पिछले 33 साल से योग, साहित्य, शोध, शिक्षण तथा प्रशिक्षण में निरंतर कार्य कर रहे हैं। हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में स्नातकोत्तर उपाधि के बाद 'मालवी एवं ब्रज लोकगीतों में कृष्णकथा' शीर्षक पर हिंदी में पीएचडी उपाधि प्राप्त की है। हिंदी, मालवी, गणित, अंग्रेजी, संस्कृत, योग, क्रीड़ा, पर्यावरण, बेटी बचाएं-बेटी पढ़ाएं आदि को लेकर विस्तृत लेखन कार्य किया है। इनकी रचनाएं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं सहित प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रकाशित व प्रसारित की गई हैं। मसानिया द्वारा लिखी हिंदी चालिसा विद्यार्थियों को अध्यापन में मददगार साबित होती है। इन्होंने शिक्षा गायन, शोध और नवाचार को भी बढ़ावा दिया है।

    फोटो : 13एसजेआर21

    कैप्शन- डॉ. दशरथ मसानिया।

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    संतोष मालवीय, वरिष्ठ अध्यापक हिंदी विषय

    इन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कई बार काव्य पाठ कर जिले का मान बढ़ाया है। उनके पढ़ाए विद्यार्थी हिंदी में हमेशा उत्तीर्ण हुए। जिस पर उन्हें शिक्षा विभाग द्वारा पुरस्कृत भी किया जा चुका है। वे देशभर में हिंदी कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर कविताओं के माध्यम से हिंदी को बढ़ावा देते हैं। कविता पाठ के माध्यम से ये हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। मालवीय ने हिंदी में एमए किया है। कॉलेज में प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ ही उन्होंने यूजीसी नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। मालवीय का कहना है कि आज के अध्यापकों का मुख्य ध्येय छात्रों में शुद्ध उच्चारण, लेखन आदि समझ पैदा करना होना चाहिए जिससे वर्तनीगत अशुद्धियों में कमी आएगी।

    फोटो : 13एसजेआर22

    कैप्शन-संतोष मालवीय।

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    और जानें :  # SHAJAPUR. HINDI DIVAS
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