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    बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार

    Published: Mon, 08 May 2017 07:00 PM (IST) | Updated: Tue, 09 May 2017 10:37 AM (IST)
    By: Editorial Team
    beti mukhagni 201759 103652 08 05 2017

    श्योपुर। एक पिता का अंतिम संस्कार सिर्फ बेटा ही कर सकता है और श्मशान में महिलाओं के जाने पर पाबंदी जैसी तमाम दकियानूसी प्रथाओं की पाबंदियां तोड़ एक बेटी ने पूरे समाज के सामने पिता का अंतिम संस्कार किया। बेटे की तरह पूरे विधि-विधान से पिता को मुखाग्नि दी। मामला श्योपुर शहर का है।

    मोती मार्केटिंग में काम करने वाले 54 वर्षीय रमेश मोरे निवासी पंडित पाड़ा को रविवार की दोपहर अचानक हार्ट अटैक आ गया, इलाज के दौरान श्री मोरे ने दम तोड़ दिया। सोमवार की सुबह श्री मोरे के अंतिम संस्कार की बारी आई तो परिजन व समाज के लोग चिंता में पड़ गए।

    क्योंकि, श्री मोरे को एक भी पुत्र नहीं था, उनकी तीन बेटियां हैं। समाज के लोग चिंतित थे उस दौरान साहित्यकार व बेटी बचाओ अभियान के सदस्य प्रभात प्रणय ने सुझाव दिया कि, बड़ी बेटी अश्विनी से पिता का अंतिम संस्कार कराया जाए।

    अश्विनी अब परिवार में सबसे बड़ी है इसलिए, वह बेटे का फर्ज पूरा करे। श्री प्रणय की बात पर सभी लोग सहमत हुए। इसके बाद बीकॉम की छात्रा अश्विनी पिता की अर्थी के आगे अग्नि कलश लेकर घर से श्मशान तक गई। उसके बाद विधिवत तरीके से मुखाग्नि देकर पिता का अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार के दौरान कई बार अश्विनी फूट-फूटकर रोई और बेसुध हो गई यह देखकर अंतिम संस्कार में शरीक हुए लोगों की भी आंखें भर आईं। श्री मोरे के परिवार में उनकी पत्नी सीमा के अलावा दो और बेटियां अनन्या व अक्षदा हैं।

    दोनों दोस्तों का बेटियों ने किया अंतिम संस्कार

    इसे संयोग ही कहिए कि, बचपन से साथ रहे, साथ पढ़े और एक ही मोहल्ले में रहने वाले दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार उनकी बेटियों ने किया। पंडित पाड़ा निवासी स्व. रमेश मोरे के बचपन के दोस्त राजकुमार पाठक का दो साल पहले कैंसर की बीमारी से निधन हो गया था। राजकुमार पाठक को भी कोई बेटा नहीं था। उनकी दो बेटियां थी। बड़ी बेटी चित्रांगदा शर्मा ने बेटे का फर्ज निभाते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

    सबसे पहले मोनिका शिंदे ने पेश की थी मिशाल

    आम शहरों की तुलना में पिछड़े श्योपुर जिले में सबसे पहले यह मिशाल पंडित पाड़ा निवासी मोनिका शिंदे ने पेश की थी। करीब पांच साल पहले की बात है जब, मोनिका शिंदे के पिता का निधन हो गया। मोनिका का कोई भाई नहीं था। पिता के अंतिम संस्कार के लिए परिजन व समाज के लिए किसी रिश्तेदार या उसके बेटे की तलाश कर रहे थे तब मोनिका ने आगे आकर खुद अपने पिता के अंतिम संस्कार की इच्छा जताई। उसके बाद चित्रांगदा पाठक और अब अश्विनी ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

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