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    यहां पावभर केरोसिन देने पर मिलता है पांच बर्तन पानी

    Published: Mon, 19 Jun 2017 02:37 PM (IST) | Updated: Tue, 20 Jun 2017 01:43 PM (IST)
    By: Editorial Team
    bhimlat village 19 06 2017

    हरिओम गौड़, श्योपुर । बारिश न होने से जिले में पानी का संकट बढ़ गया है। विजयपुर और कराहल ब्लॉक के जंगली व दूरस्थ गांवों में पानी के लिए मारमारी मची है। लोग तीन से चार किमी दूर तक पानी लेने जा रहे हैं। ग्राम पंचायतें पेयजल सुविधा करने में पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। ऐसा ही एक नजारा कराहल ब्लॉक के भीमलत गांव में देखने को मिल रहा है।

    इस गांव के परिवारों को एक पॉव केरोसिन देने के बाद पांच बर्तन पानी मिल रहा है, जिसके पास केरोसिन नहीं उसे पीने का पानी बोर से नहीं मिलता। 76 परिवारों की आबादी वाले भीमतल गांव के सारे हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुएं व अन्य जल स्त्रोत सूख चुके हैं।

    पानी के लिए एकमात्र ग्राम पंचायत का एक बोर है, लेकिन उसके लिए बिजली का कनेक्शन नहीं। पंचायत ने बोर चलाने के लिए जनरेटर खरीदकर रख दिया, लेकिन उसे चलाने के लिए डीजल की व्यवस्था नहीं की। पंचायत ने जनरेटर और बोर ग्रामीणों के भरोसे छोड़ रखा है। खुद ही इसे चलाओ और पानी भरो।

    ग्रामीणों के पास डीजल की कोई व्यवस्था नहीं। इसलिए पीडीएस दुकान से रसोई व घर में उजाले के लिए मिलने वाली केरोसिन से जनरेटर को चला रहे हैं। पंचायत द्वारा जनरेटर व बोर चलाने के लिए एक युवक जरूर तैनात कर रखा है।

    यह युवक बोर पर पानी लेने आने वाले हर आदिवासी परिवार से एक-एक पौआ केरोसिन लेता है, उसके बाद ही बोर से पांच बर्तन पानी भरे जाते हैं। रोज सुबह 10 बजे बोर चलाने का समय है। उससे पहले ही आदिवासी परिवार केरोसिन से भरी शराब बौतलें (पौआ) लेकर लाइन में लग जाते हैं। यहां पानी लेने वहीं परिवार जाता है जो साथ में केरोसिन लेकर जाए।

    दो दिन में एक घर को सात बर्तन पानी

    ऐसी ही हालत कराहल ब्लॉक के ही कलमी गांव की है। यहां का बोर भी जनरेटर से चलता है। यह जनरेटर दो दिन में एक बार चालू किया जाता है। जनरेटर को चलाने के लिए पंचायत ने एक युवक तैनात कर दिया है। यह युवक बोर चालू होते ही एक परिवार को 7 बर्तन पानी ही भरने देता है।

    ग्रामीणों का कहना है कि एक दिन के डीजल के पैसे वह देने को तैयार हैं, लेकिन पंचायत के सचिव-सरपंच राजी नहीं होते और दो दिन में सात बर्तन पानी एक परिवार को देते हैं।

    10 – 10 दिन नहीं नहाते

    जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां जलसंकट के कारण मवेशी विलुप्त हो गए हैं। पहले हर घर में गाय या बकरी मिलती थी, लेकिन अब वह भी नहीं दिखतीं। भीमलत निवासी रामकुमार आदिवासी ने बताया कि पानी नहीं मिलने के कारण गांव के लोग आठ-आठ, दस-दस दिन में तो नहाते हैं। ऐसी स्थिति में मवेशियों को पीने का पानी कहां से लाएं। गांव में ऐसे कई लोग हैं जो रोज न नहां पाने के कारण चर्मरोग से बीमार हो गए हैं।

    जनरेटर में फूंक रहे केरोसिन

    एक आदिवासी परिवार को घर में उजाले व रसोई के लिए 5 लीटर केरोसिन पीडीएस दुकान से मिलती है। भीमलत गांव के आदिवासी इस केरोसिन का उपयोग चूल्हे या फिर चिमनी की बजाय जनरेटर के लिए करते हैं। कई परिवारों का कहना है कि केरोसिन आधे महीने भी नहीं चल पाती। इसके बाद आस-पास के गांवों में जाकर आदिवासी परिवारों से 35 रुपए लीटर में केरोसिन खरीदते हैं। उससे जनरेटर चलता है।

    पंचायत ने जनरेटर चलाने के लिए कभी डीजल नहीं दिया। ग्रामीण रोज एक-एक पौआ केरोसिन इकट्ठा कर उससे जनरेटर चलाते हैं। - कांता आदिवासी, निवासी भीमलत

    एक पौआ केरोसिन देने पर पांच बर्तन पानी भरने देते हैं। जिस दिन केरोसिन खत्म हो जाता है, उस दिन किसी से उधार लेना पड़ता है या फिर दूसरे गांव से 35 रुपए लीटर में लाते हैं। - बाबू आदिवासी, निवासी, भीमलत

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