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    पानी की व्यवस्था करने में फेल पंचायतें, 45 में गांवों में भीषण जलसंकट

    Published: Fri, 17 Feb 2017 04:07 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 04:07 PM (IST)
    By: Editorial Team

    योपुर। नईदुनिया न्यूज

    ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा के लिए तीन योजनाएं शासन की ओर से चल रही हैं। इसके बाद भी गांवों में पीने का पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। सरपंच-सचिव लोगों को पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे। यह हम नहीं बल्कि सिंचाई विभाग की रिपोर्ट बता रही है। जिसमें 45 पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें सरकार ने नल-जल योजना, स्थल जल योजना और मुख्यमंत्री पेयजल योजना के तहत सारी सुविधाएं कर रखी हैं, लेकिन पंचायतें इन योजनाओं के बोरों को चला भी नहीं पा रहीं। नतीजा सर्दी के सीजन में ही कई गांवों में भीषण जलसंकट है।

    जिले में नलजल योजना, स्थल जल योजना व मुख्यमंत्री योजना चालू है। कुल 194 पंचायतों में इन योजनाओं के तहत पानी देने के लिए लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। बावजूद इसके 45 पंचायतों में पानी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। 194 में से सिर्फ 149 पंचायतों में ही इन योजनाओं के तहत पानी देना चालू बताया जा रहा है। यह आंकड़े विभागों की समीक्षा में सामने आए हैं। हकीकत यह है कि इन आंकड़ों में से भी 45 के अलावा तकरीबन 35 पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें योजना चालू बताई गई, लेकिन इन पंचायतों में भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। श्योपुर में 71 में से 2 पंचायतों को पानी नहीं मिल रहा। इसी तरह कराहल में 74 में से 17 पंचायतों को और विजयपुर में 49 में से 26 पंचायतों को लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इन पंचायतों के ग्रामीणों को गंदे तालाबों व नदी का गंदा पानी पीना पड़ रहा है, जो गर्मिया शुरू होते ही गंभीर बीमारियां पैदा करने लगेगा। साथ ही कुपोषण को भी बढ़ावा देगा। जबकि नलजल योजना से लेकर अन्य योजनाओं को बेहतर तरीके से चलाने के लिए सिंचाई विभाग से हटाकर पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    पानी के लिए तीन किमी तक का सफर

    अभी सर्दियों का सीजन है और इस सीजन में ही कई गांवों के लोगों को तीन-तीन किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। आवदा के ढाबा गांव के ग्रामीण तीन किमी दूर केरका गांव से पानी ला रहे हैं। कराहल के चल बीलेडी गांव के लोग तीन किमी दूर भोटूपुरा से पानी लाते हैं। नीची राहरौन गांव के आदिवासी तीन किमी दूर रानीपुरा तो सलमान्या के डांडा गांव के लोग तीन किमी दूर दूसरे गांव से पानी ला रहे हैं। यह तो सिर्फ उदाहरण मात्र हैं। कई गांवों में इससे भी भयंकर हालात हैं।

    बिजली के कारण कई पंचायतों में नहीं मिल रहा पानी

    कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बिजली के कारण किसी भी गांव में पानी सप्लाई बंद नही होनी चाहिए, लेकिन इन निर्देशों के बाद भी बिजली कंपनी पर इसका कोई असर नहीं है। नतीजा 11 से ज्यादा ऐसी पंचायतें है, जिनमें बिजली के कारण योजना बंद पड़ी हुई है। यानी बिजली कंपनी ने योजनाओं को चालू करने के लिए पंचायतों को कनेक्शन ही नहीं दिया। इनमें कराहल ब्लॉक की राहरोन पंचायत में स्थल जल योजना बिजली के कारण बंद पड़ी हुई। इसी तरह कराहल की ही बासेड पंचायत में भी बिजली के कारण स्थल जल योजना बंद है। जबकि विजयपुर के हीरापुरा में तो नलजल योजना बीते 6 महीने से डीपी खराब होने के कारण बंद है, जिसे अब तक बिजली कंपनी शुरू नहीं करा पाई।

    मोटर तक नहीं डलवा सकी पंचायतें

    नलजल, स्थल जल व मुख्यमंत्री योजनाओं को सुचारू रूप से पंचायतें नहीं चला पा रही हैं। पंचायतें महज केबल चोरी हो जाने के बाद उनमें दूसरी केबल डलवाकर योजना को चालू नहीं करा पा रही है। जबकि कई गांवों में तो योजना के तहत मोटर तक नहीं डाली गई है। कराहल के भेला गांव में जनरेटर में डीजल न डलने के कारण स्थल जल योजना बंद पड़ी हुई है। जबकि पूरी जिम्मेदारी पंचायत की है और इसका पूरा खर्च पंच-परमेश्वर योजना से करना है।

    वर्जन

    -जिन नल-जल व स्थल जल योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायत की है, उन्हें पंचायत को ही चलाना है। पेयजल में लापरवाही बरतने वाली पंचायत के सचिव-सरपंच पर कार्रवाई करेंगे। लोगों को पानी की समस्या नहीं होने देंगे। जहां बिजली की समस्या है, उसे तत्काल दूर करवाया जाएगा।

    वीरेन्द्र सिंह

    एडीएम व प्रभारी जिपं सीईओ श्योपुर

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