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    नेमप्लेट पर लिखवा रखा है-कृपया सिफारिश लेकर आए है तो न मिलें

    Published: Thu, 14 Sep 2017 12:15 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 08:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    sunil sheopur 2017914 01947 14 09 2017

    श्योपुर। अधिकारियों का तबादला होने के बाद कार्यालयों के बाहर लगी नेम प्लेट पर पुराने अफसर का नाम हटाकर नए अफसर का नाम लिख दिया जाता है। लेकिन, श्योपुर कोतवाली में पदस्थ टीआई सुनील खेमरिया ऐसे हैं जो तबादला होकर जहां भी जाते हैं वहां अपनी नेम प्लेट को साथ ले जाते हैं।

    पिछले 14 साल से वह अपनी नेम प्लेट को साथ लेकर चल रहे है। इस दौरान सुनील खेमरिया छह जिले और करीब 10 थाने बदल चुके हैं।सब इंस्पेक्टर पद से भर्ती हुए सुनील खेमरिया को बेहतर काम के कारण पीएचक्यू ने साल 2003 में आउट ऑफ प्रमोशन देकर टीआई बनाया था।

    टीआई बनने के बाद सबसे पहली पोस्टिंग 2003 में ही भिंड जिले में हुई। भिंड के तत्कालीन एसपी साजिद फरीद सापू ने सुनील खेमरिया को भिंड कोतवाली का टीआई बनाया। जिस दिन खेमरिया ने भिंड कोतवाली का चार्ज लिया उसी दिन ऑफिस के बाहर एक नेम प्लेट लगवाई जिस पर उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर के साथ यह भी लिखवाया कि ' कृपया सिफारिश हेतु न मिलें" ।

    2003 से 2005 तक सुनील खेमरिया भिंड में रहे। इसके बाद बालाघाट, शिवपुरी, सतना, मंदसौर, फिर दोबारा भिंड और फिर 2016 में श्योपुर जिले में पदस्थ हुए। इन 14 साल में छह जिले और 10 थानों में रहे सुनील खेमरिया को पहली पोस्टिंग के समय बनाई नेम प्लेट से इतना लगाव है कि, उसे तबादला होने के बाद भी अपने साथ ले जाते हैं।

    पहले किसी की सिफारिश नहीं मानी, अब परिस्थितियां बदल गईं

    14 साल पहले जो बात लिखी उस पर अभी भी अमल कर पा रहे हैं या नहीं? इस सवाल के जवाब में टीआई खेमरिया बताते हैं कि, जब यह लिखवाया था तब 100 फीसदी पालन किया। किसी नेता, अफसर या बड़े से बड़े दबंग की सिफारिश नहीं मानी। जो भी सिफारिश लेकर आता था उसे यही जवाब दिया जाता था कि जिसको सिफारिश करनी है वह एसपी के पास जाएं। जो एसपी बोलेंगे वहीं माना जाएगा, इसके अलावा किसी की सिफारिश नहीं मानी जाएगी।

    बकौल श्री खेमरिया अब हर काम में राजनीतिक दखल बढ़ गया है। पुलिसिंग पहले जैसी नहीं रही। इसलिए 14 साल पहले लिखी इस बात का पालन अब शत-प्रतिशत नहीं हो पा रहा। अब किसी की छोटी-मोटी सिफारिशें तो मान लेते हैं ,लेकिन गंभीर अपराधों में आज भी किसी की सिफारिश नहीं सुनते।

    इसलिए नेम प्लेट पर लिखवाया सिफारिश के लिए न मिलें

    2003 में सुनील खेमरिया पहली बार टीआई बने थे। उसी समय आईपीएस साजिद फरीद सापू पहली बार किसी जिले के एसपी बनकर भिंड में आए थे। तीखे तेवर वाले एसपी सापू ने टीआई खेमरिया सहित सभी थाना प्रभारियाें को यह चेतावनी दी थी कि थानों में सिर्फ पुलिसिंग होगी। घटना व अपराध के हिसाब से 100 फीसदी सच्ची एफआईआर दर्ज की जाएं। किसी नेता अफसर या दबंग की सिफारिश पर न तो किसी निर्दोष पर झूठा फंसाया जाए नहीं किसी आरोपी पर मेहरबानी की जाए। एसपी की यह बात टीआई खेमरिया को ऐसी जंची कि उन्होंने नेम प्लेट पर लिखवा लिया कि सिफारिश के लिए न मिलें।

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