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    यहां मध्‍यप्रदेश के बच्‍चे राजस्‍थान के स्‍कूल में जाते हैं पढ़ने जानिए क्‍योंं?

    Published: Wed, 13 Sep 2017 03:51 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 02:36 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    शिवपुरी-पोहरी। सरकारें पांच साल में बदलती रहीं, हर कोई विकास के दावे भी करता रहा, लेकिन आदिवासी बाहुल्य पोहरी विकासखंड का राजस्थान सीमा से लगे गांव इंदुरखी में लोगों को आज भी विकास का इंतजार है। कल्पना करना कठिन है कि यहां के परिवार आज भी लालटेन युग में जीवन यापन कर रहे हैं। 20 साल से गांव में बिजली नहीं हैं। पेट भरने के लिए गेहूं पिसाने भी 12 किमी दूर राजस्थान के शहरौल जाना पड़ता है।

    यही हाल स्कूल का प्राथमिक पाठशाला के नाम पर जर्जर भवन हैं। पांचवीं की पढ़ाई के बाद अधिकांश बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं जो जज्बा दिखाते हैं, उन्हें पढ़ने हर दिन 12 किमी दूर राजस्थान के शहरौल की पाठशाला में जाना पड़ता है। यह सब तो छोड़िए गांव में पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं हैं। बरसाती नदी का गंदा पानी ही ग्रामीणों की प्यास बुझाने का एकमात्र साधन हैं। गांव में एक हैंडपंप स्थापित कराया गया था, लेकिन खराब होने के बाद उसे आज तक सुधरवाया ही नहीं गया है।

    ग्रामीण कहते हैं कि अब तो इन सबकी आदत पड़ गई है, क्योंकि विकासखंड मुख्यालय गांव से 45 किमी दूर है। शिकायत लेकर पहुंचने में ही दिन गुजर जाता है। जनप्रतिनिधि कभी गांव आते नहीं हैं चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं उसके बाद आज तक उन्हें गांव में नहीं देखा। आजाद भारत का ये गांव इंदुरखी नेताओं और सरकारों को मुंह चिढ़ाता नजर आता है, जो सार्वजनिक मंचों से हर गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की हुंकार भरते हैं।

    अंधेरे में गांव, चिमनी व लालटेन का सहारा

    इंदुरखी में रहने वाले ग्रामीणों की मानें तो गांव में 20 साल से लाइट नहीं हैं और वह चिमनी व लालटेन के सहारे उजाला करते हैं। इतना ही नहीं बच्चों की पढ़ाई भी चिमनी व लालटेन की रोशनी में ही होती है। ग्रामीण अखेराज का कहना है कि गांव में लाइट न होने के कारण कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है और खासकर बारिश के दिनों में ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि इन दिनों सांप आदि निकलते हैं और ग्रामीणों को कई बार सांप व जहरीले कीड़ों ने खा भी लिया है।

    एक हैंडपंप वह भी खराब

    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एक हैंडपंप है और वह भी खराब है। इसके चलते ग्रामीणों के लिए पीने के पानी की समस्या है। इसकी शिकायत भी कई बार पोहरी में जाकर खराब हैंडपंप की शिकायत की, लेकिन आज तक हैंडपंप सही नहीं करवाया गया है। मजबूरी में ग्रामीणों को बरसाती नदी का पानी पीना पड़ रहा है।

    बरसाती नदी के लिए भी उतरनी पड़ती है घाटी

    ग्रामीणों का कहना है कि बरसाती नदी के पानी के लिए भी उन्हें घाटी से नीचे उतरकर एक किमी दूर जाना पड़ता है, तब कहीं जाकर उन्हें दूषित पानी मिलता है। ग्रामीणों का कहना है गर्मी के दिनों में जब यह पानी सूख जाता है तो यहां से भी 5 किमी दूर जाकर पानी लाना पड़ता है।

    दूषित पानी पीने से ग्रामीण हो रहे बीमार

    ग्रामीणों का कहना है कि बरसाती नदी का दूषित पानी पीने के कारण कई ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। लोग झोलाछापों या झाड़फूंक कर अपना इलाज करवा रहे हैं, जबकि गांव में आज तक कोई भी स्वास्थ्य टीम या एएनएम व अन्य स्टाफ भी नहीं आता है, जिससे ग्रामीण इलाज को भी मजबूर हो रहे हैं।

    गेहूं पिसाने जाते हैं 12 किमी दूर राजस्थान

    ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गांव में कोई साधन नहीं है। इसके चलते उन्हें 12 किमी दूर राजस्थान के शहरौल में जाना पड़ता है, तब कहीं जाकर वह गेहूं व अन्य दैनिक आवश्यकताओं का सामान लेकर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाज के लिए भी ग्रामीणों को शहरौल जाना पड़ता है।

    एकमात्र शाला भवन, वह भी जर्जर

    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में महज एक मात्र प्राथमिक शाला है, वह भी पूरी तरह से जर्जर है। शाला भवन में कई जगह दरारें हैं। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है, लेकिन शाला भवन की मरम्मत तक नहीं कराई गई है। बारिश के दिनों में शाला भवन में पानी भी टपकता है।

    वोट मांगने आते हैं जनप्रतिनिधि

    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में चुनावों के दौरान जनप्रतिनिधि महज वोट मांगने के लिए ही आते है और उनके द्वारा गांव में कोई भी विकास नहीं किया गया है। यहां पर न तो कोई अधिकारी ही दौरे पर आता है और न ही अन्य कोई स्टाफ, जिसके चलते ग्रामीण अपनी परेशानी भी किसी को नहीं बता पाते है।

    यह बोले ग्रामीण

    पानी के लिए गाँव से 1 किलोमीटर दूर घाटी चढ़कर पानी लाना पड़ता है। पानी बहुत गंदा है यही पीना पड़ता है।

    बिलासी बाथम, ग्रामीण

    गांव में 20 साल से लाइट नहीं है, जिसके कारण हमें चिमनी और लालटेन के सहारे अपना जीवन यापन करना पड़ता है।

    रामा बाथम, ग्रामीण

    गांव में महज एक स्कूल है जो पांचवीं तक है, आगे की पढ़ाई के लिए हमें 12 किमी दूर राजस्थान के शहरौल में जाना पड़ता है।

    रॉकी बाथम, छात्र

    यह बोले एसडीएम

    आपके द्वारा इंदुरखी गांव के बारे में बताया गया है, मैं स्वयं इस गांव का दौरा करूंगा। यहां जो भी मूलभूत सुविधाएं हैं, उन्हें उपलब्ध कराई जाएंगी।

    अंकित अष्ठाना, एसडीएम पोहरी

    बिजली कंपनी द्वारा ऐसे गांवों का सर्वे कराया जा रहा है, जहां पर बिजली नहीं हैं। सर्वे के बाद इन गांवों में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

    एपी गौतम, सहायक प्रबंधक बिजली कंपनी पोहरी

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