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    प्रशासन पात्र-अपात्र, तो डूब प्रभावित जिंदगी की कशमकश में उलझे

    Published: Wed, 15 Nov 2017 07:40 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:40 PM (IST)
    By: Editorial Team

    -70 फीसदी पात्र परिवारों को मिली प्रथम किश्त, दूसरी किश्त लेने में नहीं दिखा रहे रुचि, पानी उतरने के बाद रोजी-रोटी की तलाश में पुश्तैनी जगह लौटे-

    सुसारी। नईदुनिया न्यूज

    कुक्षी तहसील के सरदार सरोवर बांध के डूब की जद में आने वाले 21 ग्रामों के हजारों परिवारों की स्थिति पुनर्वास पैकेज के पात्र व अपात्र के चक्कर में ऐसे उलझ गई है कि वे न तो अब डूब के रहे और न पुनर्वास के। दो पाटों के बीच वे अपनी जिंदगी की कश्मकश में उलझकर रह गए हैं। उधर, पुनर्वास पैकेज की प्रथम किस्त 70 फीसदी पात्र परिवारों को दे दी गई है, लेकिन दूसरी किस्त उसमें से महज 4 फीसदी परिवारों को ही दी है।

    तहसील की सबसे बड़ी डूब की बसाहट निसरपुर व अन्य डूब के ग्रामों के बाशिंदे सरदार सरोवर बांध का पानी उतरने के बाद एक बार फिर मजबूरन अपनी पुश्तैनी जगह पर रोजी-रोटी की तलाश में जुट गए हैं। प्रशासन पात्र व अपात्र के चक्कर से बाहर निकले तो पुनर्वास क्षेत्रों में मूलभूत सुविधा जुटाने पर ध्यान दे। मामले को लेकर नईदुनिया की पड़ताल।

    2525 व्यक्ति को माना पात्र

    कुक्षी तहसील के डूब में आने वाले 21 ग्रामों में प्रभावित मकानों की संख्या 3170 है। इनमें रहने वाले 2525 व्यक्ति को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 5 लाख 80 हजार की राशि के पुनर्वास पैकेज का पात्र माना गया है। यहां गौरतलब है कि मकान को इकाई माना गया है और उसमें रहने वाले व्यक्तियों को अलग रखा गया है। इसकी वजह यह है कि डूब में बहुत से परिवार संयुक्त रहते हैं, लेकिन उन्हें पुनर्वास स्थलों पर भूखंड पृथक-पृथक दिए गए हैं।

    इन गांवों में मिली प्रथम किस्त

    शासन के नियमानुसार जो लोग पुनर्वास पैकेज के पात्र माने गए हैं, उनके खाते में पुनर्वास पैकेज की प्रथम किस्त के रूप में 3 लाख रु. अब तक 2525 पात्र हितग्राहियों में से 1784 के बैंक खातों में डाल दी गई है। वहीं डूब में आने वाले ग्राम मलवाड़ा, सिसगांव, बटगांव, बोधवाड़ा, डेहर, चंदनखेड़ी, मलवाड़ी व मोलखड़ में शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को प्रथम किस्त का भुगतान कर दिया है।

    मात्र 4 फीसदी लोगों ने ली दूसरी किस्त

    पहली किस्त का भुगतान करने के बाद दूसरी किस्त जो 2 लाख 80 हजार की है, उसे लेने के लिए अब हितग्राही को आगे आना होगा। इस किस्त को लेने के लिए शासन को यह स्पष्ट करना होगा कि उसने अपना डूब का मकान ता़ेड दिया है तथा पुनर्वास में मकान बनाना प्रारंभ कर दिया है, तब उसे दूसरी किश्त का भुगतान किया जाएगा। शासन ने अब तक 1784 हितग्राहियों को पहली किस्त दी है, लेकिन उसमें से अब तक महज 74 परिवारों ने ही दूसरी किस्त ली है।

    बन रहे असमंजस के हालात

    क्षेत्र में 11 पुनर्वास स्थल बनाए गए हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सबसे बड़ी समस्या व्यापार-व्यवसाय को लेकर आ रही है। ऐसे में क्षेत्र में बैक वॉटर कम होने के साथ लोग वापस डूब क्षेत्र में रोजी-रोटी के लिए जा रहे हैं। वहां उनका सहारा पुराना मकान है। ऐसे में लोग मकान नहीं ता़ेड रहे हैं। हालांकि पुनर्वास स्थलो पर पहली किस्त मिलने के बाद लोगों द्वारा 1086 मकानों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसके विपरीत डूब में आने वाले 3170 मकानों में से अब तक महज 73 मकान टूटे हैं। इसके पीछे का कारण है अब तक पुनर्वास स्थलों पर समुचित व्यवस्था का नहीं होना है।

    आंकड़ों में ही उलझा है प्रशासन

    पुनर्वास स्थलों पर विकास कार्य पूरी तरह ठप है। अधिकारी आंकड़ों के खेल में ही उलझे हैं। प्रशासन 418 परिवारों को मकान बनाकर पुनर्वास में रहने की बात कह रहा है। जबकि इसमें से लगभग 350 मकान तो पहले से ही बने हुए हैं, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी इस तरह पेश की जा रही है कि अधिक से अधिक लोगों ने मकान बना लिए हैं, लेकिन सच तो यह है कि पुनर्वास स्थलों पर जिन लोगों को पैकेज की राशि दी है, उनके मकान निर्माणाधीन है।

    तीन माह का समय दे रहे हैं

    पात्र हितग्राही को पुनर्वास पैकेज की प्रथम किस्त मिलने के बाद उसे तीन माह में मकान का कार्य करना है। दूसरी किस्त के लिए हितग्राही को पुराने मकान का फोटो, टूटे मकान का फोटो व पुनर्वास स्थल पर बनाए जा रहे मकान का फोटो ग्राम पंचायत या जनपद पंचायत में नोडल दल को प्रस्तुत करने के बाद दूसरी किस्त दी जा रही है। -रिशव गुप्ता, एसडीएम कुक्षी

    फैक्ट फाइल

    -कुक्षी तहसील के 21 डूब प्रभावित गांव के बनाए गए 11 पुनर्वास स्थल।

    -शासन 3170 मकानों को मानता है डूब में।

    -3170 मकानों में से 2525 हितग्राही को पात्र माना है 5 लाख 80 हजार के पुनर्वास पैकेज में।

    -2525 पात्र हितग्राहियों में से 1784 को दी प्रथम किस्त।

    -1784 में से महज 74 हितग्राहियों ने ही ली दूसरी किस्त।

    -11 पुनर्वास स्थलों पर करोड़ों के अस्थाई कार्य, स्थाई मूलभूत सुविधा देने वाले कार्य बंद।

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    और जानें :  # susari. doob
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