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    मीट खाने वाले स्लॉटर हाउस देख आएं तो खाना त्यागकर बुद्ध बन जाएंगे

    Published: Fri, 17 Feb 2017 07:40 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 05:42 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल, नवदुनिया न्यूज। 'जो लोग मीट खाते हैं, यदि वे एक बार जाकर स्लॉटर हाउस की साइट को देख आएं, तो वे सब इसे त्यागकर बुद्ध बन जाएंगे। चाहे बात सीहोर की हो या भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस की। दोनों ही इतनी गंदगी और सड़ांध है कि मीट हाईजेनिक रह ही नहीं सकता है। हमें यह कहते हुए अच्छा नहीं लगता है कि आप लोग (राज्य शासन) न तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हो, न ही नियम-कानूनों के हिसाब से चलते हो और ग्रीन ट्रिब्यूनल की सुनते ही नहीं हो।'

    स्लॉटर हाउस की शिफ्टिंग के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की जूरी ने गुरुवार को यह टिप्पणी की। जूरी ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में उपस्थित हुए अफसरों से पूछा कि 'भोपाल शहर का लगातार विस्तार हो रहा है। आबादी के साथ-साथ मीट की डिमांड भी बढ़ रही है। इससे निकलने वाले वेस्ट (कचरे) की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। हमें नजर ही नहीं आ रहा है कि आप इस दिशा में कोई प्लानिंग कर रहे हो? हम समझ ही नहीं पा रहे हैं कि भविष्य को लेकर आपकी क्या तैयारियां हैं? जिंसी स्लॉटर हाउस और सीहोर स्लॉटर हाउस दोनों की शिफ्टिंग के आदेश दिए दो साल होने जा रहे हैं, आपने अब तक कुछ नहीं किया? आखिर क्यों?'

    मुख्यमंत्री के सचिव और नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त विवेक अग्रवाल ने बताया कि सॉलिड वेस्ट की समस्या से निपटने के लिए वेस्ट टू एनर्जी क्लस्टर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इसी तरह जल्द ही स्लॉटर हाउस की शिफ्टिंग और आधुनिकीकरण के लिए क्लस्टर पॉलिसी बनाई जाएगी।

    राज्य सरकार ने बायो मेडिकल वेस्ट, सॉलिड वेस्ट और म्युनिसिपल वेस्ट को लेकर पॉलिसी बनाकर काम किया जा रहा है, लेकिन स्लॉटरिंग (बूचड़खाना) को लेकर अब तक शासन स्तर पर कोई पॉलिसी बनी ही नहीं हैं। अलग-अलग नगरीय निकाय ही अपने स्तर पर इनका संचालन और नियमन करते आ रहे हैं।

    आदमपुर छावनी में ही बनेगा स्लॉटर हाउस

    तमाम जद्दोजहद और विरोध के बावजूद आखिरकार स्लाटर हाउस आदमपुर छावनी में ही बनेगा। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त विवेक अग्रवाल ने एनजीटी को बताया कि आदमपुर छावनी में लैंडफिल साइट के नजदीक ही स्लॉटर हाउस का निर्माण किया जाएगा। यहां 51 एकड़ जमीन नगर निगम के पास है। इसी में से 5 एकड़ जमीन स्लॉटर हाउस के लिए आवंटित कर दी गई है। इसके आसपास डेढ़ किलोमीटर तक कोई आबादी भी नहीं है। यहां स्थित एक झुग्गी बस्ती को शिफ्ट करा दिया गया है।

    गांव के स्कूल की शिफ्टिंग के लिए नया भवन निर्माण हो गया है। इसे अप्रैल तक शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस साइट तक एक नई सड़क भी बनाई जा रही है, ताकि आबादी के बीच से कचरे और जानवरों से भरे वाहन नहीं गुजरेंगे। स्लॉटर हाउस के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मार्च 2018 तक नया स्लॉटर हाउस बनाकर इसका ऑपरेशन भी शुरू करा दिया जाएगा।

    एक सप्ताह में देना होगा हलफनामा

    एनजीटी ने आयुक्त विवेक अग्रवाल को एक सप्ताह के अंदर इस जवाब को हफलनामे के साथ जमा कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान निगमायुक्त छवि भारद्वाज, एडीएम दक्षिण रत्नाकर झा, सीहोर नगर पालिका के सीएमओ अमरसत्य गुप्ता भी मौजूद थे।

    बाजारों में खुले में चिकन की स्लॉटरिंग से कितना कचरा निकलता है?

    एनजीटी ने आयुक्त अग्रवाल से पूछा कि चिकन (मुर्गे) की स्लॉटरिंग से बाजारों में प्रतिदिन कितना कचरा निकलता है, क्या इसका कोई रिकॉर्ड शासन के पास है? क्या चिकन का कचरा बायोमेडिकल वेस्ट नहीं है? जानवरों के खून और मांस (वेटनरी वेस्ट) के टुकड़ों को आप कौन से कचरा मानते हैं? पुराने भोपाल की गलियों में चले जाइए, श्यामपुरा के आगे खुले में मिल रहा मांस क्या हाइजीनिक है? इनका कचरा कहां जाता है? क्या इन्हें खाने वाले लोग स्वस्थ्य रह पाएंगे? इसको लेकर भी सरकार को पॉलिसी बनानी चाहिए।

    विरोध से पलटे विधायक

    आदमपुर छावनी में शासन ने नगर निगम को जमीन दी है। नगर निगम अपनी जमीन पर क्या करना चाहता है? यह वही तय करेगा। मैंने अपनी बात शासन को बता दी। फैसला अब शासन और नगर निगम को करना है। मुझे इससे कोई लेना-देना नहीं हैं। - रामेश्वर शर्मा, विधायक हुजूर

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