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    'आज छोटी बहन ने पहना है स्वेटर, कल मेरी बारी'

    Published: Sat, 14 Jan 2017 04:01 AM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 05:30 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    खरगोन, विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव। 'आज मैं स्वेटर कहां से पहनती। आज तो मेरी छोटी बहन ने स्वेटर पहना है। कल मेरा नंबर आएगा। हम दोनों बहनों के बीच एक ही स्वेटर है।' यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा की बयानी है। जो बातें उसने बड़े सहज अंदाज से कहीं हैं, लेकिन इस कड़वी सच्चाई ने हमें जरूर हिला के रख दिया है।

    क्योंकि जहां इस हाड़ जमा देन वाली ठंड में हम लोग बिना गर्म कपड़ों के बाहर नहीं निकल पाते हैं, वहीं ये दोनों बालिकाएं एक ही स्वेटर में पूरी ठंड निकालने को मजबूर हैं। मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाली ये कोई इकलौती छात्रा नहीं, जो केवल गणवेश में स्कूल पहुंची हो। सरकारी स्कूल के कई मासूम ऐसे परेशानी से रोज झूझते हैं। अलसुबह से यह बच्चे कांपते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं।

    शुक्रवार को न्यूनतम तापमान जहां 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं ये बच्चे अपने बस्तों व किताबों के साथ स्कूल पहुंचे। धूप का इंतजार करते बच्चे ठंड से दो-चार हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि अधिकांश सरकारी स्कूलों में श्रमिक, किसान, मजदूर आदि परिवारों के बच्चे अध्ययन के लिए आसपास के गांवों से भी पहुंचते हैं।

    ...तो साध ली चुप्पी

    ग्राम उमरखली से आई शासकीय कन्या उमावि क्र. 1 में कक्षा 12वीं की छात्रा से जब स्वेटर को लेकर पूछा गया तो उसने चुप्पी साध ली। छात्रा ने बताया कि वह कल स्वेटर पहनकर आएगी। शुक्रवार को उसकी छोटी बहन ने स्वेटर पहन रखा है। घर में मौजूद एक ही स्वेटर को बहनें एक दिन छोड़कर पहनती हैं। इसी तर्ज पर सतवाड़ी के मजदूर परिवार की कक्षा 12वीं की छात्रा ने बताया कि पिछले वर्ष उसका स्वेटर फट गया। तब से परिवार नया स्वेटर नहीं दिला सका।

    रेटवां और बिरोठी से आई किसान व मजदूर परिवार की छात्राओं ने यही पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा कि पिता ने आश्वस्त किया है कि पैसे का इंतजाम होने पर वे स्वेटर दिलाएंगे। शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र. 11 में कक्षा 6 से 8 तक के कई बच्चों के पास भी स्वेटर नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों ने बताया कि वे घर पर चादर या कंबल ओढ़कर ठंड से बचाव करते हैं।

    गोता लगा रहा पारा

    गर्म तासीर की पहचान रखने वाला निमाड़ में इस बार न्यूनतम पारा लगातार गोते लगा रहा है। पिछले तीन दिनों में यहां पारा 4 से 6 डिग्री नीचे आ गया। शुक्रवार को पारा 3.5 डिसे तक लुढ़क गया। बावजूद जिला प्रशासन ने सुबह के स्कूलों की पाली का समय नहीं बदला। इसके ठीक उलट उन जिला मुख्यालयों में समय बदल दिया गया, जहां पारा 6 डिसे से तक पहुंचा। हालांकि कुछ स्कूल प्रबंधनों ने अपने स्तर पर स्कूल के समय में आंशिक परिवर्तन किया है। गौरतलब है कि शासन विद्यार्थियों को साइकल, गणवेश व पुस्तकें उपलब्ध करवाता है। अभिभावकों ने कहा कि कई बच्चे गरीब श्रेणी में हैं। उन्हें वर्ष में एक बार स्वेटर उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

    गर्म कपड़े पहनें

    -विद्यार्थियों को सुझाव दिया गया है कि ठंड से बचने के लिए गर्म वस्त्रों का उपयोग करें। दोपहर की पाली संचालित की जा रही है। -आरके गुप्ता, प्राचार्य, शासकीय कन्या उमावि क्र. 1, खरगोन

    बचाव करें

    - अधिक ठंड का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अस्थमा सहित अन्य एलर्जी से पीड़ित मरीजों को ठंड से बचाव करना चाहिए। नजरअंदाज करने पर यह ठंड जानलेवा भी हो सकती है। -डॉ. रविश सराफ, एमडी मेडिसिन, खरगोन

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