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    70 साल की महिला ने संथारे के बाद ली भगवती दीक्षा

    Published: Thu, 07 Sep 2017 08:17 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Sep 2017 08:56 AM (IST)
    By: Editorial Team
    santhara ujjain mp 201798 8563 07 09 2017

    नागदा (उज्जैन)। जैन समाज की एक महिला को जीवन के अंतिम पड़ाव पर संयम पथ पर चलने की दीक्षा मिली, जबकि इसके चंद घंटे पहले ही उन्होंने संथारा ले लिया था। आमतौर पर दीक्षा के पहले दीक्षार्थियों को वर्षों तक संतों के सानिध्‍य में रहना पड़ता है। गुरुवार रात 9 बजे उनका देवलोकगमन हो गया।

    गांधीग्राम कॉलोनी निवासी अमोलक बहन कोठारी (70 वर्ष) लंबे समय से बीमार थीं। मंगलवार दोपहर उन्होंने संथारा की इच्छा जताई। दोपहर बाद करीब 3.45 बजे उन्हें महासती विचक्षणाश्रीजी ने संथारा के पचकाण करवाए। बुधवार शाम को अमोलक बहन ने भगवती दीक्षा लेने की इच्छा जताई। इसके बाद शाम 6.24 बजे महासतीजी ने उन्हें भगवती दीक्षा प्रदान की।

    इतनी जल्दी नहीं मिलती अनुमति

    दरअसल दीक्षा लेने के पहले सालों तक मुमुक्षु को संतों के सान्न्ध्यि में रहकर अपनी इंद्रियों पर विजय पाने के साथ ही धार्मिक शिक्षा भी लेना होती है। इसकी लंबी यात्रा होती है। इस यात्रा के बाद जब गुरु को लगता है कि मुमुक्षु अब दीक्षा के लिए योग्य है तब दीक्षा दी जाती है।

    स्थानकवासी जैन समाज के मीडिया प्रभारी लोकेश कर्नावट के मुताबिक यहां वर्षों से बीमार चल रहीं अमोलक बहन की स्थिति बुधवार को ज्यादा खराब हो गई। जब उन्होंने दीक्षा लेने की मंशा जताई तो विचक्षणाश्रीजी ने सूरत में विराजीत आचार्य रामलालजी से दीक्षा देने की अनुमति मांगी। गुरुदेव ने परिस्थितियों को सुनने के बाद अनुमति दे दी। शहर में यह पहला मामला है जब संथारा के तुरंत बाद किसी को संयम पथ की दीक्षा दी गई हो।

    15 मिनट में ग्रहण की दीक्षा

    बुधवार शाम 6.24 बजे जब अमोलक बहन ने दीक्षा की मंशा जाहिर की तब तक वह पूरे होश में थीं, उनकी इच्छा के बाद महासतीजी ने तत्काल 15 मिनट में सारी प्रक्रियाओं को पूराकर उन्हें दीक्षा ग्रहण करवा दी।

    समाधि संस्कार होगा

    भगवती दीक्षा लेने के बाद अमोलक बहन का नाम महासती अमोलकश्रीजी रखा गया है। साध्वी का गुरुवार रात देवलोकगमन हो गया। शुक्रवार सुबह 11 बजे महावीर भवन से उनका डोल निकाला जाएगा। साध्वी बनने के चलते उनका संत की तरह ही समाधि संस्कार किया जाएगा। इस खबर के मिलते ही रतलाम, महिदपुर रोड, महिदपुर, थांदला, बदनावर, बांगरोद आदि जगहों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।

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