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    पुलिस की पीड़ा पर कांस्टेबल ने लिखी कविता, मिले 25 हजार से ज्यादा लाइक्स

    Published: Thu, 20 Apr 2017 11:57 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 08:32 AM (IST)
    By: Editorial Team
    police 20 04 2017

    बड़नगर (उज्जैन)। पुलिसकर्मियों की जरूरत सबको होती है, फिर भी उन्हें पसंद नहीं किया जाता। इसे एक आरक्षक ने महसूस किया और पुलिस की पीड़ा कविता में पिरो दी। उन्होंने कविता 'पुलिस क्या है..." जैसे ही फेसबुक पर पुलिस मंच पत्रिका पेज पर शेयर की, एक सप्ताह में ही उसे 25 हजार लाइक्स मिले और इसे हजार से ज्यादा बार शेयर भी किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आरक्षक की सराहना की है।

    बड़नगर थाने में पदस्थ आरक्षक कृष्णा बैरागी मूलत: जावरा (रतलाम) के सरसी गांव के हैं। बचपन से ही उन्हें गीत, गजल, कविता लिखने का शौक रहा, 4 वर्ष पूर्व पुलिस की नौकरी कर ली। 6 माह पूर्व वे अपने दो म्यूजिक एलबम 'ये दूरियां' और 'रहमतें जो मुझ पर हुई तेरी खुदा' रिलीज कर चुके हैं। जयपुर की आर्यन वैष्णव ने उन्हें रेप गाने का ऑफर किया था लेकिन वे पुलिस में रहकर जनसेवा करते हुए ही अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते हैं।

    काव्यपाठ की आय गरीबों को

    आरक्षक बैरागी ने बताया कि कई कविताएं लिखी हैं। कवि सम्मेलनों से न्योता भी आता है। विभाग से अनुमति मिलने पर कवि सम्मेलन से होने वाली आय से गरीब व असहाय लोगों की मदद करूंगा। उन्होंने बताया कि उनकी कविता को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पुलिस हाउसिंग पवनकुमार जैन ने भी पसंद किया और फोन पर उत्साहवर्धन किया। वहीं मप्र विशेष सशस्त्र बल 29वीं बटालियन दतिया के कमांडेंट एसएस चौहान ने भी लाइक किया है।

    कृष्णा बैरागी की पूरी कविता

    पुलिस क्या है ? एक कविता ...

    पुलिस, पुलिस सुख-सुविधाओं का त्याग है , पुलिस अनुशासन का विभाग है।

    पुलिस, पुलिस देश भक्ति व जनसेवा का नारा है, पुलिस अमानवता से पीड़ितों का सहारा है।

    पुलिस, पुलिस नियम कानून की परिभाषा है, पुलिस अपराधों का गहन अध्ययन है जिज्ञासा है।

    पुलिस, पुलिस अमन व शांति का सबूत है, पुलिस अपराधियों के डरावने सपने का भूत है।

    पुलिस, पुलिस है तो देखो कितनी शांति है, पुलिस नहीं तो चाराें तरफ क्रांति है।

    पुलिस, पुलिस जनता की सेवा के लिए त्योहार व परिवार छोड़ देती है,

    और पुलिस की पत्नी करवा चौथ का व्रत फोटो देखकर तोड़ देती है।

    पुलिस, पुलिस कभी ठंड में ठिठुरती तो कभी गर्मी में जल जाती है।

    फिर भी उसे परिवार के लिए एक दिन की छुट्टी नहीं मिल पाती है।

    पुलिस, पुलिस त्याग है तपस्या है साधना है।

    पुलिस जनता रूपी देवता की करती सेवा और आराधना है।

    जनता अक्सर ये क्याें भूल जाती है।

    कि गोली तो पुलिस भी अपने सीने पर खाती है।

    शहीद सिर्फ सीमा पर जवान नहीं होता,

    सैंकड़ों की संख्या में पुलिस भी देश के अंदर जान गंवाती है।

    लोग कहते है पुलिस कहा है। मैं कहता हूं पुलिस हर जगह है।

    पुलिस, पुलिस सांप्रदायिक तनाव में है, पुलिस राजनीतिक चुनाव में है।

    पुलिस जुलूस में, जलसे में झूलों में है। पुलिस कभी ईद तो कभी होली के मेलों में है।

    पुलिस गली-गली, गांव-गांव, शहर-शहर है, पुलिस जनता की सेवा मे हाजिर आठों पहर है।

    पुलिस के भी होते सपने हैं, उनमे भी होती संवेदनाएं हैं ,

    बस लगाते जाते उनपर आरोप, कोई नहीं समझता उनकी वेदनाएं हैं।

    जो न्योछावर है सदैव आपके लिए, उस पुलिस पर तुम अभिमान करो ,

    मानो तो बस इतनी सी गुजारिश है मेरी, तुम पुलिस का अपमान नहीं सम्मान करो।

    तुम पुलिस का अपमान नही सम्मान करो।

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