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    पन्नों में उलझा सिंहस्थ प्रतिवेदन, गुजर गया साल

    Published: Thu, 12 Oct 2017 10:11 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 01:10 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sinhasth 12 10 2017

    सुधीर नागर, उज्जैन। प्रसिद्ध धार्मिक मेले सिंहस्थ महाकुंभ 2016 का प्रतिवेदन बनाने में उलझी सरकार नई योजना तैयार नहीं कर सकी है। प्रतिवेदन के पन्ने बढ़ाने और घटाने में साल गुजार दिया। पहले 700 से अधिक पन्नों का प्रतिवेदन बना फिर इसे 300 पन्नों तक सीमित करने में ताकत लगाई गई।

    सिंहस्थ समापन पर सरकार द्वारा प्रतिवेदन प्रकाशित करने की व्यवस्था है, लेकिन इस बार यह काम लालफीताशाही में उलझ गया। सिंहस्थ 2016 सम्पन्न हुए एक साल और पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसका प्रतिवेदन प्रकाशित नहीं हो सका है।

    पिछले एक साल से प्रशासनिक अफसर काम में जुटे थे किंतु काम नहीं हो सका। सूत्रों का कहना है कि अफसरों ने अपनी चलाई तो प्रतिवेदन 700 से ज्यादा पन्नों का हो गया। जब इसे प्रकाशित करने की बारी आई तो प्राधिकरण अध्यक्ष दिवाकर नातू चौंक गए, क्योंकि इतने अधिक पन्नों का प्रतिवेदन सिंहस्थ के इतिहास में पहले कभी बना ही नहीं। इस पर प्रतिवेदन को नए सिरे से तैयार कराने का काम शुरू हुआ। काट-छांट के बाद इसे करीब 325 पन्नों का किया गया है।

    क्या है प्रतिवेदन

    प्रतिवेदन वह अहम दस्तावेज है जिसमें सिंहस्थ महाकुंभ का पूरा विवरण होता है। क्या काम हुए, लागत कितनी आई, किन लोगों ने इसमें अहम भूमिका निभाई के अलावा उन दिक्कतों का भी उल्लेख होता है जो आयोजन के दौरान आयोजकों के सामने आईं। प्रतिवेदन प्रकाशन का उद्देश्य इन कमियों को दूर कर आगामी आयोजन को सफल बनाने में मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में होता है।

    वाहवाही लूटने में डूबी लुटिया

    अंदर की कहानी यह है कि अफसरों और नेताओं ने सिंहस्थ प्रतिवेदन के बहाने वाहवाही लूटने की कोशिश की। जिस अफसर को यह काम सौपा गया था, उसने आला अफसरों को खुश करने के लिए इसमें अनुपयुक्त जानकारियां भी जोड़ दीं। नतीजतन प्रतिवेदन के पन्ने बढ़ते चले गए। नेताओं में भी अपने नाम जुड़वाने की होड़ लगी रही। इसी वजह से प्रतिवेदन समय पर भी पूरा नहीं हो सका।

    सिंहस्थ और प्रतिवेदन

    - सिंहस्थ 12 साल में एक बार उज्जैन में होता है। इसमें देशभर से साधु-संतों का समागम होता है।

    - सिंहस्थ के दौरान साधु-संत पर्व और शाही स्नान करते हैं। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।

    - पूर्व में सिंहस्थ समापन के तीन-चार माह बाद ही प्रतिवेदन प्रकाशित होता रहा है।

    - प्रतिवेदन एक तरह से आगामी सिंहस्थ के लिए गाइडलाइन होता है।

    जल्दी ही होगा प्रकाशित

    यह सही है कि इस बार सिंहस्थ का प्रतिवेदन प्रकाशन में देरी हो गई है। जल्द ही इसका प्रकाशन कर दिया जाएगा। प्रतिवेदन के पन्ने अधिक होने की भी समस्या थी।

    -दिवाकर नातू, अध्यक्ष सिंहस्थ प्राधिकरण, उज्जैन

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