Naidunia
    Sunday, August 20, 2017
    Previous

    हैरान करने वाला है भगवान शिव के जन्‍म का वाकया

    Published: Mon, 17 Jul 2017 12:53 PM (IST) | Updated: Mon, 17 Jul 2017 03:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lord shiva birth 17 07 2017

    उज्‍जैन। धर्म के अनुसार यदि किसी का बचपन है तो निश्चत ही उसका अंत भी होगा। लेकिन ब्रह्मा, विष्‍णु और शिव के जन्‍म किस प्रकार हुआ इसका दावा तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसका जिक्र हमें कहीं-कहीं मिल जाता है। विष्णु पुराण में शिव के बाल स्‍वरूप का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार ब्रह्मा को संसार की संरचना के लिए एक बच्चे की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए काफी तपस्या की, एक दिन अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण जानना चाहा तो उसने बड़े प्‍यार से जवाब दिया कि उसका नाम ‘ब्रह्मा’ नहीं है इसलिए वह रो रहा है।

    तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रुद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। लेकिन बाल स्‍वरूप शिव फिर भी चुप नहीं हुए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया, पर शिव को वह नाम भी पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। शिव तब भी चुप नहीं हुए तो भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कई नाम दिया, पर बालक को वह नाम भी पसंद नहीं आया और वे फिर रोने लगे। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और इन 8 नामों (रुद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से भगवान शिव आज भी जाने जाते हैं।

    वहीं शिव के इस प्रकार ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने की एक पौराणिक कथा का उल्‍लेख विष्णु पुराण में भी नजर आता है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्मांड जलमग्न था तब ब्रह्मा, विष्णु के सिवा कोई भी देव या प्राणी नहीं था। ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे तो शिवजी प्रकट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया, तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया।

    कालांतर में विष्णु के कान के मैल से पैदा हुए मधु-कैटभ राक्षसों के वध के बाद जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया। अत: ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें