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    विक्रम विश्वविद्यालय में निर्माण 29 लाख का, बिल थमाया 52 लाख

    Published: Fri, 08 Sep 2017 09:30 PM (IST) | Updated: Sat, 09 Sep 2017 08:44 AM (IST)
    By: Editorial Team
    vikram univercity 08 09 2017

    उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय में एक ठेकेदार को 29 लाख रुपए के निर्माण कार्यों के एवज में 52 लाख रुपए की स्वीकृति देने का मामला सामने आया है। अंतिम हस्ताक्षर के लिए कुलपति के पास इसे भेजा गया तो उन्होंने टेंडर की शर्तों के बाद इसे पकड़ा और बिल का भुगतान रोक दिया।

    अकादमिक सूत्रों के अनुसार बिल्डिंग व मेंटेनेंस के लिए विवि ने 52 लाख रुपए का टेंडर प्रकाशित किया था। जिसमें कई ठेकेदारों ने हिस्सेदारी की थी। बिलो रेट 29 लाख रुपए पर यह ठेका एक कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने ब्वॉयज होस्टल, गर्ल्स होस्टल, केमेस्ट्री विभाग, जियोलाजी विभाग सहित अन्य कई भवनों का मेंटेनेंस किया था।

    पूर्णता प्रमाणपत्र के बाद जो कार्य करने की राशि दर्शाई गई थी वह 52 लाख रुपए थी, जबकि टेंडर 29 लाख रुपए में दिया गया था। प्रशासनिक विभाग की मिलीभगत के चलते यह बिल प्रारंभिक तौर पर पास भी कर दिया गया था और इस बिल के भुगतान की तैयारी हो गई थी। जब अंतिम हस्ताक्षर के लिए कुलपति के पास इसे भेजा गया तो उन्होंने टेंडर की शर्तों के बाद इसे पकड़ लिया और बिल का भुगतान रोक दिया।

    इन विभागों ने किया था बिल का अनुमोदन

    सब इंजीनियर हेमंत शर्मा, इंजीनियर अतुल जैन, लेखा विभाग, फाइनेंस कंट्रोल विभाग तथा रजिस्ट्रार ने भी इस बिल के भुगतान के लिए अनुमति दे दी थी। यदि यह बिल पकड़ में नहीं आता तो इसका भुगतान भी हो जाता। मजेदार बात यह है कि इस निर्माण कंपनी को विवि में पहली या दूसरी बार ही काम मिला है। इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी की भी भागीदारी बताई जा रही है।

    हमने भुगतान रोक दिया

    यह बात सही है कि 52 लाख के टेंडर को बिलो रेट 29 लाख रुपए में कार्यादेश दिया गया था। किंतु निर्माण कंपनी ने मूल ठेके की राशि का बिल ही बनाकर विवि प्रशासन को दे दिया है। अब इसकी जांच की जा रही है और कंपनी का भुगतान रोक दिया है।

    - परीक्षित सिंह कुलसचिव विक्रम विवि

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