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    साफ्टवेयर की गड़बड़ियों से मिलेगी निजात, किसानों को एनआईसी से मिलेगी नकल

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:07 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:07 AM (IST)
    By: Editorial Team

    पेज 13 की लीड खबर

    - वेब जीआईएस में लगातार हो रही थी गड़बड़ियां, आसान होगा साफ्टवेयर आपरेट करना

    विदिशा। राजस्व विभाग के लिए सरकार द्वारा लागू किया गया प्राइवेट कंपनी का साफ्टवेयर वेब जीआईएस राजस्व कर्मचारियों और किसानों के लिए सिरदर्द बन गया था। इसमें लगातार आ रही गड़बड़ियों के चलते जिले में अब इस साफ्टवेयर को राजस्व विभाग से हटा दिया है। अब फिर से राजस्व का पूरा काम एनआईसी पर होगा। इससे राजस्व विभाग की गड़बड़ियों से राजस्व कर्मचारियों और किसानों को राहत मिल जाएगी। अभी किसानों को आईटी सेंटर के माध्यम से खतरा, खतौनी की नकलें दी जा रही थीं, जिसमें लगातार गड़बड़ियां आ रही थीं और ये गड़बड़ियां विवादों का कारण बन रही थी। एनआईसी से राजस्व कार्य होने से पहले की तरह फिर राजस्व का काम आसान हो जाएगा।

    जानकारी के अनुसार लंबे समय से अधिक समय से राजस्व विभाग के कर्मचारी और किसान जीआईएस साफ्टवेयर की गड़बड़ियों की कारण काम करना मुश्किल हो गया था। इस साफ्टवेयर को न तो चलाना आसान था और न ये भरोसेमंद था। इसके कारण लगातार राजस्व रिकार्ड में गड़बड़ियां आ रही थी। स्थिति ये हो गई थी कि पटवारियों को हड़ताल करना पड़ी थी। वहीं राजस्व विभाग में गड़बड़ियां सुधारने का अतिरिक्त काम बढ़ गया था। निजी भूमि को कहीं सरकारी तो कहीं भूमि स्वामियों के नाम बदलने की इसमें शिकायतें आ रही थीं। इन स्थितियों को देखते हुए राजस्व का काम वेब जीआईएस साफ्टवेयर से वापस लेकर सरकारी एजेंसी एनआईसी को दिया गया है।

    ये हो रही थी परेशानी

    राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वेब जीआईएस (जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम) एक प्राइवेट कंपनी का साफ्टवेयर है। जिसे राजस्व संबंधी सभी कार्य सौंपे गए थे। लेकिन शुरुआत से ही इस साफ्टवेयर में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं। जब किसान अपना खसरा खतौनी आदि निकलवाते थे तो उसमें रिकार्ड की गई गड़बड़ियां नजर आती थी। कहीं भूमि स्वामी का ही नाम बदल दिया जाता था तो कहीं प्राइवेट भूमि सरकारी हो जाती थी। कहीं किसान की भूमि में ऐसा स्थल दिखा दिया जाता था, जो वहां मौजूद ही नहीं था। इन समस्याओं को लेकर किसानों में भारी आक्रोश पनप रहा था। जिले के कई किसान संगठन इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन भी कर चुके थे।

    पटवारी कर चुके हड़ताल

    राजस्व रिकार्ड में हो रही गड़बड़ियों के कारण किसानों और राजस्व कर्मचारियों के बीच झगड़े बढ़ने लगे थे। लोग पटवारियों और राजस्व अधिकारियों की लगातार शिकवे शिकायतों का दौर चालू हो गया था। इससे परेशान होकर पटवारियों ने हड़ताल भी की थी। वहीं पटवारियों को राजस्व कार्य करने में परेशानी आ रही थी। पटवारियों की हड़ताल और किसानों द्वारा की जा रही शिकायतों के बाद सरकार ने ये निर्णय लिया है।

    कलेक्टर के पास पहुंचती थी शिकायतें

    एसडीएम आरपी अहिरवार ने बताया कि वेब जीआईएस से जो राजस्व रिकार्ड प्राप्त होता था, उसे लेकर किसान शिकायतें कर रहे थे। इसे दुरुस्त करने के लिए तहसीलदार एसडीएम के पास आवेदन भेजते थे। एसडीएम कलेक्टर के पास किसान की समस्या भेजते थे। इसके बाद कलेक्टर के आदेश पर रिकार्ड ठीक होता था। इस तरह से राजस्व विभाग के पास अतिरिक्त कार्य बढ़ गया था। अफसर अपने रुटीन के कामों के साथ इन विवादों के निपटारों में भी परेशान हो रहे थे।

    एनआईसी से ये होगा फायदा

    राजस्व रिकार्ड का पूरा कार्य अब एनआईसी(नेशनल इंफार्मेशन सेंटर) के माध्यम से दोबारा होगा। इससे राजस्व विभाग के कर्मचारियों को राहत मिलेगी। एनआईसी का साफ्टवेयर बेहद आसान है, जिसे पटवारी और अन्य कर्मचारी आसानी से आपरेट कर लेते हैं। साथ ही इसमें रिकार्ड अपडेट करने के लिए कलेक्टर तक चक्कर लगाने की जरूरत नहीं मिलेगी। इस साफ्टवेयर से तहसीलदार ही रिकार्ड को सुधार सकेंगे।

    किसानों को सुगमता से मिलेगी नकल

    सिरोंज। किसानों के कृषि संबंधी राजस्व रिकार्ड को दुरस्त करने एवं खसरा और नक्शा की नकल प्रदाय करने का कार्य आईटी सेंटर के माध्यम से किया जा रहा था। जिससे किसानों का पूरा रिकार्ड ही गड़बड़ा गया था। किसानों को अपनी कृषि भूमि की खसरा और नक्शा की नकल लेने में काफी परेशानियां हो रही थी। नायब तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि आईटी सेंटर की प्रकिया तकनीकी रूप से जटिल है। यह प्रकिया आनलाइन है तथा इसमे वेब जीआईएस से किया जा रहा था। एनआईसी तकनीकि रूप से सुगम है। दो तीन दिन बाद एनआईसी से नकल मिलने लगेगी।

    वर्जन

    रिकार्ड हो रहा अपडेट

    वेब जीआईएस को लेकर लगातार शिकवे शिकायतें हो रहे थे। इस साफ्टवेयर को आपरेट करने में भी राजस्व कर्मचारियों को परेशानी आ रही थी। इसे देखते हुए राजस्व का कार्य फिर एनआईसी के पास आ गया है। ये आसान साफ्टवेयर है। एनआईसी में रिकार्ड अपडेट हो रहा है।

    आरपी अहिवार, एसडीएम विदिशा

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