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    अन्ना ने वरुण गांधी से कहा, राइट टु रिजेक्ट के लिए भी करें प्रयास

    Published: Thu, 18 May 2017 06:32 PM (IST) | Updated: Fri, 19 May 2017 09:53 AM (IST)
    By: Editorial Team
    anna-hazare 18 05 2017

    मुंबई। भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करते रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने भाजपा के युवा नेता वरुण गांधी को पत्र लिखकर 'राइट टु रिकॉल' बिल पर उनका अभिनंदन किया है। साथ ही उनसे 'राइट टु रिजेक्ट' कानून के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया है।

    अन्ना ने अपने पत्र में वरुण से कहा है कि आप 'राईट टू रिकॉल' का कानून बनवाने के लिए संसद में एक बिल पेश करना चाहते हैं। इसके लिए देश की जनता की तरफ से हम आपका अभिनंदन करते हैं क्योंकि ऐसे कानून से देश में सही लोकतंत्र आने में मदद मिलेगी।

    अन्ना के अनुसार, आजादी के बाद 69 साल में ऐसा बिल किसी भी सांसद ने पेश नहीं किया। हम 2008 से लगातार ऐसे कानून की मांग कर रहे हैं। इस बिल में 'राईट टू रिकॉल' की सोच के साथ-साथ 'राईट टू रिजेक्ट' की सोच भी जरूरी है। आज देश में ज्यादातर राजनीतिक दल सत्ता पाने की स्पर्धा में लगे हैं।

    सत्ता के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा के कारण उम्मीदवार के गुंडा, भ्रष्टाचारी, लुटेरा, व्यभिचारी, गुनहगार होते हुए भी पार्टी की ओर से टिकट दिया जाता है। ऐसी स्थिति में मतदाताओं को उन उम्मीदवारों को रिजेक्ट (नकारने) करने का अधिकार होना चाहिए।

    अन्ना के अनुसार, यदि मतदाता मतपत्र या मशीन पर बने नापसंदगी के बटन पर सर्वाधिक मत दे दें तो उस निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव रद हो जाना चाहिए।

    क्योंकि मतदाताओं ने सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार (रिजेक्ट) कर दिया है। उस निर्वाचन क्षेत्र में फिर से चुनाव होना चाहिए और इस चुनाव में पहले जिन उम्मीदवारों को मतदाताओं ने अस्वीकार (रिजेक्ट) किया है उनको पुनः चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

    ऐसा होने से राजनीतिक दल भ्रष्टाचारी, व्यभिचारी, लुटेरे उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट नहीं देंगी। चुनाव आयोग ने सिर्फ 'नोटा' बटन लाकर अधूरा काम किया है। उससे देश में सही लोकतंत्र नहीं आ पाएगा।

    अन्ना के अनुसार उन्होंने आठ साल पहले ही चुनाव आयोग से इस कानून के लिए बात की थी। तब चुनाव आयोग ने कहा था कि ऐसी स्थिति में फिर से चुनाव कराने का अधिकार हमारे पास नहीं है।

    ऐसा करने के लिए संसद में ही जाना होगा। इसलिए हमे लगता है कि 'राईट टु रिकॉल' के पहले 'राईट टु रिजेक्ट' कानून बनना जरूरी है।

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