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    क्षेत्रीय भाषा है हिंदी, जबरन न थोपी जाए : अदूर गोपालकृष्‍णन

    Published: Mon, 22 Feb 2016 11:34 AM (IST) | Updated: Mon, 22 Feb 2016 11:36 AM (IST)
    By: Editorial Team
    addor 22 02 2016

    मुंबई। राष्‍ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मकार अदूर गोपालकृष्णन का कहना है कि हिंदी खूबसूरत भाषा है और इसे क्षेत्रीय भाषा के रूप में गिनना चाहिए। इसे दूसरों पर थोपना नहीं चाहिए।

    उन्‍होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि हिंदी में लिखने वाले अच्‍छे लेखक हैं। मगर, आप हिंदी को दूसरों पर नहीं थोप सकते। न ही प्रशासनिक रूप से न ही किसी अन्‍य रूप से।

    यह बात उन्‍होंने गेटवे लिटफेस्‍ट के दूसरे एडिशन में कार्यक्रम से इतर कही। अदूर ने कहा कि वह महसूस करते हैं कि भारत कई संस्‍कृतियों और परंपरराओं से बना है, ऐसे में एक 'विशेष' रवैया काम नहीं करेगा। हिंदी केवल आधिकारिक तौर पर लागू की गई है। क्योंकि, आधिकारिक तौर पर वे हर किसी से एक भाषा का रवैया चाहते थे।

    भारत कई अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं, रहने की शैलियों का एक देश है। स्वाभाविक रूप से, आप को इसकी अनुमति देनी होगी और उसे समझना होगा।

    उन्‍होंने कहा‍ कि यह गलत है, जब आप सोचते हैं कि हिंदी एक राष्‍ट्रीय भाषा है और अन्‍य भाषाएं क्षेत्री हैं। सभी भाषाएं क्षेत्रीय हैं। यह तभी राष्ट्रीय भाषा बन सकती है, जब देश में हर कोई किसी एक भाषा को बोले, लेकिन ऐसा नहीं होता। उन्‍होंने कहा कि वह मानते हैं कि हिंदी को क्षेत्रीय भाषा गिनना चाहिए क्‍योंकि देश के कई हिस्‍सों में लोग हिंदी नहीं बोलते हैं।

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    • manoj22 Feb 2016, 12:37:03 PM

      suddenly this issue? seems there are vested interest trying to create wrong picture for present government? what new has happened who is imposing hindi? people with clear cut political leaning trying to present them self as non political and then creating a issue which is not there at all? was Mr. krishnan sleeping for years and suddenly raising this issue? there are enough person/NGO and vested interest hell bent on destabilizing the nation this was least expected from person like Mr. Krishnan

    अटपटी-चटपटी