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    तेलंगाना में पुरातत्वविदों को मिला लौह युग का स्मारक

    Published: Fri, 17 Mar 2017 11:19 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Mar 2017 11:22 AM (IST)
    By: Editorial Team
    historical site 17 03 2017

    हैदराबाद। पुरातत्वविदों ने तेलंगाना के नलगोंडा जिले के पदुरिवारुगुडम में लौह युग से संबंधित एक स्मारक की खोज की है। ई शिवा नागी रेड्डी और उनके सहयोगियों ने विशालकाय स्मारक का पता किया है। उनका मानना है कि यह स्मारक करीब 1000 ईसा पूर्व का है।

    स्थानीय विवेकानंद यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष टी सैदुलू से मिली जानकारी के आधार पर हमने गुरुवार को पदुरिवारुगुडम का दौरा किया। हमने पुष्टि की कि स्मारक मेगालिथिक काल से संबंधित है। यह 11 फीट लंबा खड़ा है, जिसकी चौड़ाई छह फुट है और यह मिट्टी में छह फीट गहराई तक धंसा है।

    उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आदिवासी देवाताओं या योद्धाओं के स्मारक के रूप में लौह युग के दौरान विशाल स्तंभ को स्थापित किया गया था। यह प्राचीन युग में लोहे के गलाने वाले समुदाय के सामूहिक प्रयासों का खुलासा करता है।

    पुरातत्वविदों की टीम ने चिन्ना चेरुव के निकट स्थित चंडूपाताल गांव में मेगैलीथिक युग के करीब 20 गोलाकार दफन पत्थर की जांच की। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दफन स्थल और स्मारक के क्षेत्र में सक्रिय कृषि कार्यों के कारण नुकसान होने की आशंका है। नागी रेड्डी ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार से अनोखे स्मारक की रक्षा करने के लिए कहा है, क्योंकि यह तेलंगाना के लोहे युग के इतिहास की गवाही देता है।

    नलगोंडा और गुंटूर जिलों में भी इसी प्रकार के स्मारक हैं। यद्यपि जिस साइट पर मेगालिथिक कलाकृतियों का खुलासा किया गया था, वह काकातिया साम्राज्य में किसी विशेष महत्त्व का नहीं था। मगर, यह चंदूपतला के करीब स्थित है। माना जाता है कि यहां काकतिया शासक रानी रुद्रामा देवी का मृत्यु हुई थी।

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