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    सर्विस कोर के मुद्दों को हल करने को जरूरी संशोधन करेगी सेना

    Published: Thu, 12 Oct 2017 10:45 PM (IST) | Updated: Thu, 12 Oct 2017 10:58 PM (IST)
    By: Editorial Team
    army parade new 12 10 17 12 10 2017

    नई दिल्ली। सेना ने सैन्यकर्मियों के एक समूह की इस मांग को खारिज कर दिया है कि गैर-लड़ाकू (नॉन-कॉम्बैटेंट) कर्मियों को फील्ड में तैनात नहीं किया जाए। सेना ने कहा कि सैनिक युद्ध और शांति दोनों काल में कर्तव्य का निर्वहन करते हैं।

    इसके साथ ही सेना ने कहा है कि आर्मी सर्विस कोर (एएससी) के कुछ सैन्यकर्मियों के दर्जे को लेकर भेदभाव की उनकी पीड़ा को दूर किया जाएगा। जरूरी हुआ तो इसमें संशोधन किया जाएगा। एएससी लॉजिस्टिक मदद मुहैया कराता है। शीर्ष सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।

    कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक जवान की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि अगर उसे गैर-लड़ाकू का दर्जा दिया गया है तो अभियान वाले क्षेत्र में उसकी तैनाती नहीं होनी चाहिए।

    सेना ने एक बयान में कहा कि उसने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि सेना की सभी शाखाएं और सेवाएं कॉम्बैटेंट (लड़ाकू) हैं। सेना ने अपनी इकाइयों को कभी भी गैर-लड़ाकू नहीं बताया है।

    सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नौ महीना पहले पदभार संभालने के बाद कहा था कि वह सभी शाखाओं को एक समान मानेंगे और उनका यथोचित उन्हें मिलेगा। सेना ने कहा कि सेना प्रमुख ने कुछ सैन्यकर्मियों के दर्जे में भेदभाव को दूर करने को लेकर आश्वस्त किया है।

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