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    भारत में बुलेट ट्रेन की तैयारी, जानिए इसकी खासियतें

    Published: Tue, 12 Sep 2017 07:52 AM (IST) | Updated: Tue, 12 Sep 2017 07:54 AM (IST)
    By: Editorial Team
    train 12 09 2017

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे 14 सितंबर को अहमदाबाद के साबरमती में बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे में ना सिर्फ एक नया अध्याय जुड़ जाएगा बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे।

    एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से "मेक इन इंडिया" को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत और जापान दोनों देशों की कंपनियों के बीच अनेक संयुक्त उद्यम स्थापित होंगे, जो बुलेट ट्रेन के लिए इंजन, बोगियों तथा कलपुर्जों आदि का निर्माण करेंगे। इससे भारत में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आने के साथ-साथ हजारों-लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से भारत के निर्माण क्षेत्र को नई ताकत मिलेगी। परियोजना निर्माण के दौरान ही लगभग 20 हजार निर्माण मजदूरों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके लिए इन मजदूरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बुलेट ट्रेन का पूरा ट्रैक गिट्टी रहित होगा। लिहाजा मजदूरों को गिट्टी रहित ट्रैक के निर्माण का अनुभव हासिल होगा।

    यह है बुलेट ट्रेन की खासियतें....आठ घंटे का सफर 2 घंटे 7 मिनट में

    -अहमदाबाद से मुंबई की (508 किमी) की रेल यात्रा में अभी सात से आठ घंटे लगते हैं। बुलेट ट्रेन चालू होने पर 2.07 से 2.58 घंटे लगेंगे।-परियोजना की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए है।

    -जापान 88 हजार करोड़ रुपए का ऋण (0.1 फीसदी ब्याज दर, यानी हर महीने 7-8 करोड़ रुपए मात्र) पर दे रहा है। बाकी धन भारत सरकार खर्च करेगी।

    -कर्ज की वापसी 15 वर्ष बाद से करनी होगी। 50 साल में इतना सस्ता कर्ज कभी नहीं मिला।

    -बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

    - शुरू में बुलेट ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे। इनमें 750 यात्री बैठेंगे।

    - "मेक-इन-इंडिया" को बढ़ावा देगी बुलेट ट्रेन परियोजना

    -महाराष्ट्र में इसका 156 किमी और गुजरात में 351 किमी लंबा रूट रहेगा।

    -21 किलोमीटर का सबसे लंबा टनल और 7 किलोमीटर समुद्र के नीचे से रूट रहेगा।

    -मुंबई से अहमदाबाद के बीच कुल 12 स्टेशन होंगे। मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भड़ौच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद तथा साबरमती।

    -सभी स्टेशनों पर रुकी तो 2.58 घंटे लगेंगे, कुछेक पर रुकी तो 2.07 घंटे।

    -पटरियां जमीन से 20 मीटर (करीब 70 फीट ऊपर) एलिवेटेड रहेंगी, इस कारण भूमि अधिग्रहण के पचड़े कम से कम आएंगे।

    - जापानी ट्रेनें कभी एक मिनट से ज्यादा लेट नहीं होतीं। इसका मतलब कि भारत में बुलेट ट्रेन भी पूर्णतया सुरक्षित और समय की पाबंद होगी।

    - सरकार ने अगले चरण में दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-नागपुर, मुंबई-चेन्नई और मुंबई-नागपुर रूटों पर भी बुलेट ट्रेन चलाने की रूपरेखा तैयार की है।

    - मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन करने वाला नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन इन सभी पर काम कर रहा है।

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