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    पश्चिम बंगाल में हैं 40 फीसद बाल वधुएं, बिहार दूसरे नंबर पर

    Published: Fri, 13 Oct 2017 08:46 AM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 08:49 AM (IST)
    By: Editorial Team
    child marriage 13 10 2017

    नई दिल्ली। बाल विवाह के मामले में सबसे बदतर स्थिति प. बंगाल की है। यहां चालीस फीसद बाल वधुएं हैं। बिहार दूसरे नंबर पर है तो झारखंड का तीसरा स्थान है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है।

    पंजाब व केरल इस मामले में सबसे बेहतर हालत में हैं। यहां बाल वधुओं की तादाद सात फीसद के आसपास है। इसके हिसाब से प. बंगाल में 40.7, बिहार में 39 व झारखंड में बाल वधुओं की संख्या 38 फीसद है। पंजाब व केरल में इनकी संख्या सात फीसद के आसपास है। इस रिपोर्ट का जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने भी किया है।

    दस साल की सजा का प्रावधान


    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर व दीपक गुप्ता की बेंच ने बुधवार को फैसला दिया था कि नाबालिग बीवी से शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म माना जाएगा। इसके लिए दस साल की सजा निर्धारित की गई है। अदालत ने माना था कि नाबालिग से संबंध बनाना पोक्सो एक्ट के तहत अपराध मनाना जाएगा। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट भी कहती है कि भारत में इस प्रथा से रोग पनप रहे हैं।


    दो करोड़ तीस लाख बाल वधुएं


    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भारत में तकरीबन दो करोड़ तीस लाख बाल वधुएं हैं। इसमें 2011 की जनगणना का सहारा लिया गया। इस बात का जिक्र भी किया गया कि पांच में से एक शादी कानूनों का उल्लंघन करके हो रही है। तीन फीसद लड़कियों की शादी 10 से 14 साल की आयु के बीच हो रही है। रिपोर्ट में माना गया है कि बीस फीसद लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह 18 साल की उम्र से पहले ही कर दिया जा रहा है। उधर, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि 26.8 फीसद का विवाह 18 से पहले हो रहा है। 2005-06 में ये आंकड़ा तकरीबन 47.4 था। तब से देखा जाए तो बाल वधू का प्रचलन कम होता जा रहा है।

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