Naidunia
    Friday, November 17, 2017
    PreviousNext

    जनहित में ईमानदार फैसले लें अफसर, मैं साथ हूं : मोदी

    Published: Fri, 21 Apr 2017 03:57 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 10:03 PM (IST)
    By: Editorial Team
    civil-service-day-pm-modi 2017421 22249 21 04 2017

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अफसरों से अपनी सोच में बदलाव लाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अफसर तेजी से फैसले लें और नतीजों की परवाह न करें। जनहित में लिए गए ईमानदार फैसलों के लिए वह उनके साथ खड़े रहेंगे। अगर अफसर अपने खोल से निकल कर एक साथ काम करने को आगे आएं, तो देश में बहुत तेजी से बदलाव आ सकता है।

    शुक्रवार को 11वें सिविल सेवा दिवस के मौके पर देशभर से आए अफसरों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अफसरों को तेज फैसले लेते समय डरने की जरूरत नहीं है। वे खुद हमेशा ऐसे अफसरों के पीछे ढाल बन कर खड़े रहेंगे।

    वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद करते हुए मोदी ने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि मैं 16 साल से लोक सेवा में हूं। हालांकि, मुझे कोचिंग जाने का मौका नहीं मिला।" उन्होंने अपने प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा से पूछा कि इतने समय की सेवा के बाद वे किस रैंक पर पहुंचे होते। फिर उन्होंने कहा कि वे निदेशक स्तर पर पहुंचे होते। उन्होंने अधिकारियों को यह भी कहा कि वे यह सोचना बंद कर दें कि उन्हें सब कुछ आता है। इसी तरह जूनियर-सीनियर के भेद से बचने को भी कहा। मोदी ने कहा कि लोक सेवा अधिकारियों का प्रशिक्षण अब भी गुलामी के दिनों की मानसिकता से प्रेरित है। लेकिन उन्हें अब नए विचारों को बढ़ावा देना चाहिए और अपने से जूनियर अधिकारियों से सीखने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।

    यूं होगा रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म

    मोदी ने कहा, "राजनीतिक इच्छाशक्ति रिफॉर्म (सुधार) ला सकती है। लेकिन, नौकरशाही परफॉर्म (काम करना) करती है और जब जनता की उसमें भागीदारी होती है तो ट्रांसफॉर्म (पूरा बदलाव) आता है। हमें इन तीनों को एक धारा में लाना है। जब ऐसा हो जाएगा तो हमें अच्छे नतीजे मिलेंगे।"

    तीन "सी" काम में बाधक नहीं

    कुछ अफसरों ने अपने भाषणों में कहा कि तीन "सी" कैग (नियंत्रक व महालेखा परीक्षक), सीबीआइ और सीवीसी (सेंट्रल विजिलेंस कमीशन) के भय से निर्णय प्रक्रिया में बाधा आती है। इसका नतीजा नीतिगत अपंगता के रूप में सामने आता है। इस पर मोदी ने कहा कि वे फैसले के "नतीजों" को ध्यान में रखें, न कि "उत्पादन" को।

    प्रचार से परहेज करें

    प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को अपने प्रचार के मोह से दूर रहने की सीख भी दी। उन्होंने कहा, "इन दिनों मैं देखता हूं कि जिला स्तर के अधिकारी बहुत व्यस्त रहते हैं। मैंने अपने साथ होने वाली मीटिंग में मोबाइल फोन पर रोक लगा दी है। क्योंकि अधिकारी उस दौरान भी समय निकालकर मोबाइल पर सोशल मीडिया देखने लगते हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग लोगों के हित के लिए किया जाना चाहिए।

    इस मौके पर प्रधानमंत्री ने विभिन्न श्रेणियों में 12 पुरस्कार भी दिए। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को कैशलेस गांव के लिए और राजस्थान के डुंगरपुर जिले को सोलर ऊर्जा लैंप परियोजना के लिए इनोवेशन श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें