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    देश में पहली बार हुआ पुणे में गर्भाशय प्रत्यारोपण, आठ घंटे चली सर्जरी

    Published: Thu, 18 May 2017 01:04 PM (IST) | Updated: Fri, 19 May 2017 03:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
    pune doctors 18 05 2017

    पुणे। पुणे की गैलेक्सी केयर लैपरोस्कोपी इंस्टीट्यूट (जीसीएलआई) में गुरुवार को 24 चिकित्सकीय पेशेवरों की एक टीम भारत के पहले गर्भाशय प्रत्यारोपण प्रक्रिया का हिस्सा बनने जा रही है। इस टीम में 12 सर्जनों के अलावा मनोचिकित्सक, नेफ्रोलॉजिस्ट, हृदय रोग विशेषज्ञ, इंटेन्सिविस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और नर्स शामिल हैं।

    महाराष्ट्र की रहने वाली 24 वर्षीय महिला गर्भाशय के बिना पैदा हुई थी। अब उसे उसकी मां का गर्भाशय लगाया जा रहा है। बुधवार को चिकित्सकों ने शवों पर इस प्रक्रिया को करने की प्रैक्टिस में भाग लिया, ताकि जब वास्तव में इस प्रक्रिया को किया जाए, तो गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहे। सर्जरी के बाद प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार करने के उच्च जोखिम की चिंताओं के अलावा डॉक्टरों के सामने एक और बड़ी परेशानी है।

    हर गुरुवार को होने वाली चार घंटे की बिजली की कटौती से इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। जीसीएलआई के मेडिकल निदेशक डॉ. शैलेश पुणतांबेकर ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए हमने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड से संपर्क किया है। दो चरण की सर्जरी सुबह नौ बजे शुरू होगी और आठ घंटे तक चलेगी। सर्जन चार घंटे की शल्य चिकित्सा के दौरान महिला की मां का गर्भाशय निकालेंगे।

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    डॉ. पुणतांबेकर ने कहा कि अगले घंटे में एक विशेष सॉल्यूशन से उसे साफ किया जाएगा। गर्भाशय को दाता के शरीर से लेप्रोस्कोपिक रूप से हटा दिया जाएगा। अंग दान करने वाली महिला की मां 40 साल की है। प्रत्यारोपित किए जाने वाले अंग को की होल के जरिये निकाला जाएगा। डॉ. पुणतांबेकर ने इस मिनिमल एक्सेस प्रोसीजर को शुरू किया था, जिसे दुनियाभर में पुणे तकनीक के रूप में जाना जाता है।

    सर्जरी के दूसरे चरण में यूट्रस को महिला के शरीर में लगाया जाएगा, उसे कभी भी मासिक धर्म नहीं हुए। उसकी शादी तीन साल पहले हुई थी। 19 मई को हॉस्पिटल इसी तरह की प्रक्रिया को गुजरात की रहने वाली 25 वर्षीय महिला पर परफॉर्म किया जाएगा। पहले दोनों ऑपरेशन बिना किसी मेडिकल फीस के किए जाएंगे, जबकि अगले चार ऑपरेशन 1.5 लाख रुपए में किए जाएंगे।

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    डॉक्टरों ने कहा कि अंग दाता महिला सर्जरी के 24 घंटे बाद मौखिक रूप से भोजन कर सकेगी, जबकि जिस महिला को यह अंग लगाया जाएगा वह सर्जरी के दो दिन बाद ठोस आहार ले सकेगी। एक साल बाद स्वास्थ्य के आधार पर उस महिला को गर्भधारण के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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