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    बच्चों के एडमिशन के लिए कैदियों को मिल रही जमानत

    Published: Sat, 13 May 2017 10:00 AM (IST) | Updated: Sun, 14 May 2017 08:20 AM (IST)
    By: Editorial Team
    granting bail hc 13 05 2017

    अहमदाबाद। 'कैदियों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का अधिकार है'...इसकी सोच के साथ गुजरात हाई कोर्ट ने विभिन्न मामलों में सजा काट रहे करीब 20 कैदियों को जमानत पर रिहा किया है ताकि वे फीस का बंदोबस्त कर सकें और बच्चों का स्कूल में एडमिशन करवा सकें।

    2002 गुजरात दंगों में उम्र कैद काट रहे शशिकांत मराठी उर्फ टिनियो भी ऐसे कैदियों में एक है। उसने याचिका दायर की थी कि बच्चों के एडमिशन के लिए जमानत दी जाए। उसने याचिका के साथ अपने बच्चों की मार्कशीट भी प्रस्तुत की थी। कोर्ट ने पांच दिन की जमानत पर रिहा कर दिया।

    इसी तर्ज पर हाई कोर्ट ने बीते तीन दिनों में 20 कैदियों को जमानत दी है या पैरोल पर रिहा किया है। दीपक गाधवी की जमानत आगे बढ़ा दी गई, क्योंकि उसे अपने बेटे पार्थ के एडमिशन के लिए और समय की जरूरत थी। दीपक गैंगरेप का दोषी है और उसे उम्र कैद हुई है। इससे पहले उसने अपने बेटे की आंख के इलाज के लिए जमानत मांगी थी।

    इसी तरह हत्या के दोषी राजेश ठाकुर को अपने तीन बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करने के लिए जमानत दी गई। इकबाहुसैन शेख और अशोक राठौर को भी 15-15 दिन का समय दिया गया। सभी कैदियों को जेल रिकॉर्ड देखने के बाद उन्हें जमानत मिली है।

    ...इन कामों के लिए भी जमानत

    केस-1 : जेल में सरपंच, कैसे हो गांव का विकास

    नवसारी में वाघरिच गांव का सरपंच मनहरभाई टंदेल (79 वर्ष) हत्या के आरोप में 2014 से जेल में बंद है। उसने जेल में रहते दिसंबर 2016 में सरपंची का चुनाव लड़ा था। जीतने के बाद उसी साल अप्रैल में यह कहते हुए जमानत की याचिका लगाई कि उसे गांव में सर्वे कर टैक्स तय करना है, ताकि गांव का विकास हो सके। ग्राम सभा का भी गठन सरंपच के न होने से अटका था। निचली अदालत ने याचिका खारिज कर दी तो हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब जस्टिस एएस सुपैया ने 5000 रुपए के मुचलके पर पांच दिन की जमानत दे दी। कोर्ट का मानना है कि टंदेल को रिहा करना जनहित में है।

    केस-2 : पत्नी, बेटा, बहू सब जेल में, कौन भरे बिजली बिल

    जूनागढ़ के प्रवीण वाला को बिजली बिल भरने के लिए जमानत दी गई। वाला ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी, बेटा और बहू भी जेल में हैं, इसलिए बिजली बिल जमा करने वाला कोई नहीं है। बिजली कंपनी हर माह बिल भेज रही है और समय पर भुगतान नहीं हुआ तो कनेक्शन काट दिया जाएगा। अपने परिवार की ही एक महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में चारों को पांच-पांच साल की कैद हुई है। वाला का जेल रिकॉर्ड देखने पर हाई कोर्ट ने पाया कि उसका बर्ताव अच्छा है। इससे पहले जमानत मिलने पर वाला ने वक्त पर सरेंडर किया है। इन बातों पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने उसे 10 दिन की जमानत दे दी।

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