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    रेल किरायों में सीधी बढ़ोतरी की व्यवस्था हो सकती है बहाल

    Published: Fri, 21 Apr 2017 09:46 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 09:52 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। फ्लेक्सी फेयर स्कीम को लेकर यात्रियों में बढ़ते असंतोष को देखते हुए रेलवे इस स्कीम को रद करने का निर्णय ले सकता है। इसके स्थान पर किरायों में सीधी बढ़ोतरी की पुरानी व्यवस्था बहाल हो सकती है।

    इस बात के संकेत रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य ने रेल संवाददाताओं के साथ खास परिचर्चा के दौरान दिए।

    इस दौरान अनेक संवाददाताओं ने फ्लेक्सी फेयर स्कीम से भोले-भाले यात्रियों को हो रही दिक्कत और मानसिक तनाव से अवगत कराया। संवाददाताओं ने फ्लेक्सी किरायों के स्थान पर सीधी बढ़ोतरी की पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने की सिफारिश की।

    मानसिक व आर्थिक तनाव

    संवाददाताओं का कहना था कि फ्लेक्सी किराया स्कीम जटिल होने के साथ-साथ दोषपूर्ण है। क्योंकि इसमें कई मर्तबा एक ही रूट की एक ही ट्रेन में कम दूरी के लिए अधिक और अधिक दूरी के लिए कम किराया लगता है। इससे यात्री कम दूरी की यात्रा के लिए भी अधिक दूरी का टिकट लेना पसंद करते हैं।

    इसके अलावा इसमें रिफंड को लेकर भी भारी समस्याएं हैं। मजबूरी में आखिरी वक्त पर टिकट बुक कराने वाले प्रतीक्षा सूची के यात्रियों का टिकट यदि ट्रेन छूटने के चार घंटे पहले तक कंफर्म नहीं हुआ तो उसे रिफंड मिलने की संभावना भी कम रहती है।

    यात्री को या तो रिफंड मिलता ही नहीं, या फिर मिलता है तो बहुत कम। ऐसे में यात्री को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ यात्रा न कर पाने के कारण दोहरे मानसिक तनाव का शिकार होना पड़ता है। रेलवे को बुरा-भला कहते हुए अनेक यात्री पत्रकारों से अपनी पीड़ा बयान करते हैं।

    क्या है फ्लेक्सी फेयर स्कीम

    रेलवे ने सितंबर, 2016 में राजधानी, शताब्दी व दूरंतो ट्रेनों में फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू की थी। इसके तहत हर दस फीसद बुकिंग के बाद किराये में दस फीसद की बढ़ोतरी होती है और अंततः ये डेढ़ गुना तक हो जाते हैं। रेलवे बोर्ड को स्कीम से पांच महीनों में 500 करोड़ रुपए कमाई की उम्मीद थी। लेकिन, बुकिंग घटने से केवल 120 करोड़ रुपए की कमाई हुई।

    इसे देखते हुए न केवल कुछ कम लोकप्रिय शताब्दी ट्रेनों में इस स्कीम से छूट देने का निर्णय लिया गया। बल्कि जब "हमसफर" ट्रेन चली तो उसके किराये में 15 फीसद बढ़ोतरी के साथ शुरुआती 50 फीसद बर्थों पर ही फ्लेक्सी किराये लागू किए गए। इस प्रकार इक्का-दुक्का मामलों में रियायत के साथ स्कीम को बनाए रखा गया।

    थर्ड एसी के कोच बढ़ेंगे

    संवाददाताओं का दूसरा सुझाव जिस पर रेलवे बोर्ड ने गौर करने का भरोसा दिया है वह थर्ड एसी की बोगियों में बढ़ोतरी का है। चूंकि रेलवे को सबसे ज्यादा कमाई थर्ड एसी से होती है, जबकि फर्स्ट एसी से थोड़ा व सेकंड एसी से मामूली फायदा होता है। स्लीपर व जनरल क्लास में तो नुकसान ही नुकसान है। रेलवे स्वयं भी ट्रेनों में थर्ड एसी के ज्यादा कोच लगाने पर विचार कर रही थी। इस परिचर्चा के बाद उसके इरादे को और मजबूती मिली है।

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